मणिपुर की सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मिला के खिलाफ विचाराधीन मामले में बृहस्पतिवार को तीन पुलिसकर्मियों ने अपने बयान दर्ज करवाए। इसमें गवाहों के बयान शुक्रवार को भी दर्ज किए जाएंगे।
आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट खत्म करने की मांग को लेकर इरोम शर्मिला पिछले 12 साल से भूख हड़ताल पर हैं। पुलिस ने 2006 में जंतर-मंतर पर आमरण अनशन पर बैठी शर्मिला के खिलाफ आत्महत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया था।
पटियाला हाउस अदालत के महानगर दंडाधिकारी आकाश जैन के समक्ष बृहस्पतिवार को इरोम शर्मिला (40) को पेश किया गया। अदालत ने शर्मिला को वारंट जारी कर पेश होने का निर्देश दिया था।
अदालत में सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के पूर्व इंस्पेक्टर जीएल मेहता, एएसआई अनंग पाल व सिपाही बिजेंदर सिंह ने अपने बयान में कहा कि शर्मिला की हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया था।
एम्स के पूर्व सीएमओ डॉ. प्रशांत सिन्हा ने बयान दिया कि भूख हड़ताल के कारण शर्मिला की हालत बिगड़ रही थी। एम्स में डॉ. सिन्हा ने 2006 में शर्मिला की जांच की थी। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता वीके ओहरी ने जिरह की।
अदालत ने चार मार्च 2013 को आयरन लेडी के नाम से मशहूर इरोम शर्मिला के खिलाफ आत्महत्या की कोशिश की धाराओं में आरोप तय किए थे। शर्मिला ने इन आरोपों से इनकार करते हुए मुकदमा लड़ने का फैसला किया था। शर्मिला का तर्क था कि जंतर मंतर पर भूख हड़ताल करते हुए उसने आत्महत्या करने की कोशिश नहीं की थी।