आंख में दुर्लभ कैंसर से जूझ रहे ईराकी मरीज की रोशनी बचाई
-डॉक्टरों ने प्लेक ब्रैकीथेरेपी नाम की स्पेशल थेरेपी चुनी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली के एक निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने एक 41 साल के ईराकी मरीज की आंख में लगे दुर्लभ और खतरनाक कैंसर (कोरोइडल मेलेनोमा) का सफल इलाज किया है। इस कैंसर से मरीज की दायीं आंख की रोशनी जा सकती थी, लेकिन एडवांस्ड इलाज से आंख बची रही और रोशनी भी सुरक्षित रही। मरीज को पिछले छह महीने से आंख में दिखने में दिक्कत हो रही थी। पहले इसे मामूली समस्या समझा गया, लेकिन जब परेशानी बढ़ी तो वह इलाज के लिए भारत आए। जांच में पता चला कि आंख के अंदर एक छोटे मटर जितना ट्यूमर है। यह कोरोइडल मेलेनोमा था, जो आंख का कैंसर है। अगर देर होती तो कैंसर फैल सकता था और आंख निकालनी पड़ सकती थी।
डॉक्टरों ने प्लेक ब्रैकीथेरेपी नाम की स्पेशल थेरेपी चुनी। इसमें एक छोटी रेडियोएक्टिव प्लेट (प्लेक) को सीधे ट्यूमर के पास लगाया जाता है, जो कैंसर सेल्स को मारती है। इससे आंख के बाकी हिस्सों को कम नुकसान होता है। भारत में बनी रुथेनियम-106 प्लेक का इस्तेमाल किया गया, जो सस्ती और प्रभावी है। ऑफ्थेल्मोलॉजी की हेड डॉ. अनीता सेठी और रेडिएशन ऑन्कोलॉजी के डॉ. डोडुल मंडल की टीम ने यह सर्जरी की। डॉ. सेठी ने बताया कि उनका मकसद कैंसर हटे और आंख की रोशनी भी बनी रहे था। समय पर जांच से ऐसा संभव हुआ। डॉ. मंडल ने बताया कि यह तरीका बहुत सटीक है, स्वस्थ हिस्सों को कम रेडिएशन मिलता है।