फरीदाबाद के अनखीर चौक-सूरजकुंड रोड चौड़ीकरण का काम सड़क से पत्थर निकालने की वजह से विवादों में फंस गया है।
आरोप है कि हुडा अधिकारियों ने कुछ लोगों से मिलीभगत कर बहुत सस्ते में पत्थर बेच दिए। पत्थर भी काफी कम दिखाए गए।
शुक्रवार को सेक्टर-12 स्थित प्रदर्शनी हॉल में एक प्रेंस कांफ्रेंस के दौरान पत्रकारों द्वारा सवाल उठाए जाने पर हुडा के कार्यकारी अभियंता भूपेंद्र सिंह से जिला उपायुक्त विजय सिंह दहिया ने जवाब मांगा। इस पर वह संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए। ऐसे में दहिया ने इस मामले की जांच करवाने का निर्णय लिया।
इसके लिए उन्होंने अतिरिक्त उपायुक्त की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच समिति गठित करने के निर्देश दिए। समिति 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
दहिया के मुताबिक, निर्माण कार्य के दौरान पत्थरों को निकालने की गतिविधियों में निर्धारित मापदंडों के पालन सबंधी जांच की जाएगी। जांच समिति में अभियंता व लेखा अधिकारी भी शामिल रहेंगे। इससे पहले हुडा के कार्यकारी अभियंता भूपेंद्र सिंह ने बताया कि पत्थर निकालने के लिए खनन विभाग की अनुमति ली गई है।
करीब 30 हजार क्यूबिक मीटर पत्थर निकला है, जिसे 320 रुपये क्यूबिक मीटर की दर पर पानी क्रेशर जोन में बेचा गया है। कुल मिलाकर 96 लाख रुपये का पत्थर निकला है। अनखीर चौक से सूरजकुंड चौक तक सड़क बनाने में खुदाई के दौरान इतना कम पत्थर निकलने का रिकॉर्ड देना किसी के गले नहीं उतरा। इसके बाद जांच की घोषणा कर दी गई है।
यह है प्रोजेक्ट
हुडा ने गुड़गांव मोड़ से अनखीर चौक और अनखीर चौक से सूरजकुंड चौक गोल चक्कर तक सड़क को चौड़ा करने का काम शुरू कराया है। इसका करीब 60 फीसदी काम पूरा हो गया है। 12 किलोमीटर लंबे रोड के पुनर्निर्माण पर हुडा की ओर से 85 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिसका कार्य हुडा अधिकारियों ने 31 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। बताया जाता है कि पत्थर की खुदाई सात से आठ किलोमीटर में होनी है। यह रोड 17 मीटर चौड़ा है।
किसके इशारे पर बनी डीपीआर
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली में पत्थर खनन पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। कुछ ही पत्थर खानें यहां वैध रूप से चल रही हैं। इसलिए अब पत्थर को पारस बनाकर बेचने वालों की नजर इस रोड पर लगी हुई थी। हर जगह सड़कें ऊंची की जा रही हैं, लेकिन सूरजकुंड रोड के नीचे से पत्थर निकालकर उसे और गहरा किया गया है। समझा जाता है कि खनन माफियाओं की मिलीभगत से यह पत्थर निकाला गया है। हालांकि हुडा अधिकारियों का कहना है कि इस रोड की डीपीआर जैसी बनी थी उसके हिसाब से ही काम हो रहा है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि इसकी डीपीआर किस व्यक्ति के इशारे पर ऐसी बनाई गई, जिसमें पहले से बनी हुई सड़क की खुदाई करके पत्थर निकालने की जरूरत पड़ी।