सीएमओ कार्यालय के अधिकारी ने बताया कि क्राइम ब्रांच की टीम ने किडनी प्रत्यारोपण की अनुमति के मामले में जानकारी मांगी थी। इससे जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध करा दिए गए हैं। इसमें मरीज और डोनर के दस्तावेज और मेडिकल हिस्ट्री भी शामिल हैं। वहीं सीएमओ डॉ. सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि जिला स्तरीय अंग प्रत्यारोपण समिति के सामने जो रिकॉर्ड आते हैं। उनकी जांच के बाद ही किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति दी जाती है।
दिल्ली पुलिस की जांच में पूरा सहयोग किया जा रहा है। हालांकि, सीएमओ ने इस मामले में किसी विभागीय जांच के शुरू कराने से साफ इन्कार किया है। सीएमओ यह भी नहीं बता सके कि 2022 से अब तक समिति द्वारा जिन 119 केस में अनुमति दी गई। उनमें से कितने किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े हुए हैं।
सीएमओ की अध्यक्षता में होता है फैसला
वर्ष 2018 के शासनादेश के बाद सीएमओ की अध्यक्षता में जिला स्तरीय अंग प्रत्यारोपण समिति बनाई गई थी। समिति में सीएमओ के अलावा स्वास्थ्य विभाग, एनजीओ, निजी अस्पताल के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं। समिति मरीज और डाेनर दोनों से कैमरे के सामने बातचीत कर जरूरी दस्तावेज की जांच कर प्रत्यारोपण की अनुमति देती है। वीडियो रिकॉर्डिंग को भविष्य के लिए साक्ष्य के रूप में भी रखा जाता है। 2018 से पहले यह समिति डीएम की अध्यक्षता में काम करती थी।
नोएडा में 2021 में सामने आया था मामला
वर्ष 2021 में नोएडा में किडनी ट्रांसप्लांट का मामला सामने आया था। तब स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कार्रवाई कराई गई थी। वहीं नए मामले के सामने आने के बाद वर्ष 2018 के बाद दी गई ट्रांसप्लांट की अनुमति की जांच की मांग शुरू हो गई है।