निर्माण में देरी और गुणवत्ता पर उठे सवाल, सुरक्षा रियल्टी से मांगा जवाब
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-128 स्थित जेपी विशटाउन की ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में देरी और अनधिकृत निर्माण के आरोपों की जांच तेज हो गई है। शासन की ओर से गठित समिति अब तक 700 से अधिक फ्लैट खरीदारों का पक्ष सुन चुकी है।
सुनवाई के दौरान अधिकांश खरीदारों ने निर्माण की धीमी गति पर नाराजगी जताई, जबकि कई ने निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। खरीदारों का पक्ष जानने के बाद समिति ने परियोजनाओं का निर्माण करा रही सुरक्षा रियल्टी से कई बिंदुओं पर जवाब मांगा है। इन परियोजनाओं में 18 हजार से अधिक फ्लैट खरीदार अपने घर मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
विशटाउन की परियोजनाओं को लेकर शासन को मिली शिकायतों में समय पर निर्माण पूरा नहीं होने और स्वीकृत विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) व मानचित्र के अनुरूप काम नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतों में स्वीकृत योजना से इतर अनधिकृत निर्माण का मामला भी उठाया गया है।
इन परियोजनाओं का निर्माण पहले जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड ने शुरू किया था। समय पर काम पूरा नहीं होने के कारण मामला राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) पहुंच गया। इसके बाद एनसीएलटी से स्वीकृत रिजोल्यूशन प्लान के तहत परियोजनाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी सुरक्षा रियल्टी को सौंपी गई। हालांकि, अब सुरक्षा रियल्टी पर भी लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। इसी को देखते हुए शासन ने जांच समिति गठित की है। जांच के दायरे में 11 ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के 250 टावर शामिल हैं।
समिति की अध्यक्षता नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी संतोष कुमार कर रहे हैं। इसमें प्राधिकरण के नियोजन विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक वैभव गुप्ता और वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी विजय स्वरूप के अलावा यमुना प्राधिकरण के वित्त विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक सलीम अहमद और नियोजन विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक मनीष लाल सदस्य हैं। समिति अब सुरक्षा रियल्टी से मिले जवाब और अन्य तथ्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाएगी।
समिति जांच के प्रमुख बिंदु
3000 करोड़ की वर्किंग कैपिटल: रिजोल्यूशन प्लान के तहत परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 3000 करोड़ रुपये की कार्यशील पूंजी की व्यवस्था की जानी थी। समिति इसकी उपलब्धता की जांच कर रही है।
12 हजार मजदूरों की तैनाती: प्लान के मुताबिक निर्माण कार्य के लिए 12 हजार मजदूरों की जरूरत थी। समिति मौके पर तैनात मजदूरों की वास्तविक संख्या का पता लगा रही है।
निर्माण गुणवत्ता की जांच: निर्माण की गुणवत्ता का परीक्षण किस एजेंसी से कराया जा रहा है और निगरानी की क्या व्यवस्था है, इसकी जानकारी मांगी गई है।
कोट
जांच में हमने फ्लैट खरीदारों का पक्ष लिया है। अब तक 700 से ज्यादा खरीदारों से समिति बात कर चुकी है। सुरक्षा रियल्टी से भी कई बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद समिति अपनी जांच आगे बढ़ाएगी।
- संतोष कुमार, ओएसडी, नोएडा प्राधिकरण