अदालत ने दिल्ली दंगा मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर झूठा जवाब दाखिल करने वाले जांच अधिकारी को इन मामलों में सतर्कता बरतने और उसे जागरूक करने का निर्देश दिल्ली पुलिस को दिया है। जांच अधिकारी ने अपने जवाब में कहा कि आरोपी योगेंद्र सिंह को चश्मदीद गवाह ने मौके पर देखा था लेकिन कोर्ट ने आरोप पत्र में पाया कि उसे चश्मदीद ने नहीं बल्कि हवलदार रविंदर ने पहचाना था।
कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने योगेंद्र सिंह को 30 हजार के मुचलके पर जमानत प्रदान करते हुए कहा कि जांच अधिकारी को अपने जवाब में सतर्कता बरतनी चाहिए थी। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी के अनुसार चश्मदीद मो. असलम ने आरोपी को मौके पर देखा था जो पूरी तरह गलत है क्योंकि आरोप पत्र में कुछ और कहा गया है।
अदालत ने आदेश की कॉपी संयुक्त पुलिस आयुक्त को भेजने का निर्देश दिया है ताकि जांच अधिकारी को यह सिखाया जाए कि सभी मामलों तथा खासतौर पर दंगों से जुड़े मामलों में जवाब दाखिल करने में सावधानी बरती जाए। अदालत ने यह भी कहा कि मामले में पीड़ित दुकानदार गुलफाम चश्मदीद नहीं है।
अदालत ने मामले में आरोप पत्र दाखिल होने तथा हिरासत अवधि के मद्देनजर आरोपी योगेंद्र को जमानत प्रदान कर दी लेकिन उसे दिल्ली एनसीआर से बाहर न जाने और किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल न होेने की हिदायत दी है। अदालत ने कहा आरोपी साक्ष्य से छेड़छाड़ नहीं करेगा और हर तारीख तथा बुलाने पर पेश होगा।