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महिला कोच में फैजाबाद पुहंचे तोमर, यूनिवर्सिटी गई पुलिस

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आप सरकार के कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर को दिल्ली पुलिस कल रात ही लेकर लखनऊ के लिए रवाना हो गई थी। आज वह सुबह करीब आठ बजे लखनऊ पहुंचे हैं।
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जहां से तोमर को ट्रेन से ही महिल कोच में बिठाकर फैजाबाद ले जाया जा रहा है। जहां उन्हें कॉलेज ले जाकर उनके लॉ की डिग्रियों की जांच की जा सकती है।

इसके साथ ही उस समय के अध्यापकों व स्टाफ आदि से भी पूछताछ की जा सकती है कि आखिर तोमर वहां पढ़ें हैं या नहीं? इन्हीं सभी सबूतों के आधार पर ही पुलिस अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी जो चार दिन बाद वह अदालत में पेश करेगी।

इससे पहले मंगलवार शाम को ही तोमर ने नैतिकता के आधार पर अपना इस्तीफा दे दिया था जिसके स्वीकार होने की पुष्टि खुद डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने की।

यूपी और बिहार में होगी पूछताछ

कानून मंत्री जितेंद्र तोमर को अदालत ने चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। पुलिस ने तर्क रखा कि उनकी बीएससी व एलएलबी की डिग्रियां फर्जी हैं और उसे बिहार के भागलपुर व यूपी के फैजाबाद व बुंदेलखंड ले जाकर फर्जी डिग्रियां बनाने वालों का पता करना है।

साकेत अदालत में तोमर को कड़ी सुरक्षा के बीच ड्यूटी मजिस्ट्रेट नवजीत बुद्धिराजा के समक्ष शाम 5:04 बजे को पेश किया गया। सरकारी वकील व क्षेत्रीय पुलिस उपायुक्त प्रेम नाथ ने अदालत को बताया कि दिल्ली बार काउंसिल की शिकायत पर जांच की गई।

भागलपुर व फैजाबाद जाकर भी जांच की गई और पाया गया कि तोमर के पास बीएससी व एलएलबी की डिग्रियां फर्जी हैं।

पुलिस बोली तोमर ने रचा बड़ा षडयंत्र

हमने व्यापक जांच की और पाया कि तोमर ने वहां के विश्वविद्यालय व अन्य के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा किया है। मजबूरी में तोमर को गिरफ्तार किया है और अब पूछताछ कर अन्य आरोपियों का पता लगाना है।

यह एक काफी बड़ा षड़यंत्र है और पांच दिन की रिमांड जरूरी है। अदालत के पूछे जाने पर माना कि तोमर को सीआरपीसी की धारा 161 व धारा 91 का नोटिस आज ही दिया है।

बीसीआई एडवोकेट एक्ट के तहत कार्रवाई कर सकती है, लेकिन हम पुलिस हैं और किसी भी अपराध की जानकारी मिलने पर संज्ञान लेकर कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।
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बचाव पक्ष के तर्क

तोमर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुलका, राजीव खोसला व आरके वाधवा ने पुलिस पर बदनीयती से काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मामला बीसीआई व हाईकोर्ट में लंबित है ऐसे में पुलिस को गिरफ्तारी का अधिकार ही नहीं है।

गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए कहा कि पुलिस ने जबरन उनके मुवक्किल को कार्यालय से उठाया व थाने लाकर कानूनी तौर पर दिए जाने वाले नोटिस दिए। भारत में पहली बार हुआ है कि आरोपी को गिरफ्तार कर उसे बाद में तय नोटिस दिए जाएं।

उनके मुवक्किल के पास फर्जी नहीं बल्कि असली डिग्रियां हैं। उसे साबित करने का मौका तक नहीं दिया गया। आरटीआई के जवाब में यही आया है कि डिग्रियां असली है लेकिन रोल नंबर किसी और का लिख दिया गया। यदि पूछताछ करनी है तो संबंधित कॉलेज के प्रधानाचार्य व डीयू से जाकर करें।

अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि मामला काफी गंभीर है और निष्पक्ष जांच के लिए आरोपी की पुलिस रिमांड जरूरी है। इस मामले में गहराई तक जाने व दस्तावेज के सत्यापन के लिए वे आरोपी को चार दिन के पुलिस रिमांड पर भेजते हैं।
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