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Delhi NCR News: आजादी के जश्न के बीच दिल्ली की सड़कों पर तिरंगा बेचते मासूम

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-हाथों में झंडा और आंखों में घर की चिंता
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सचिन कुमार
नई दिल्ला। देश स्वतंत्रता दिवस के जश्न में डूबने को तैयार है। बाजारों से लेकर स्कूलों और सरकारी इमारतों तक तिरंगे की शान दिखाई दे रही है। लेकिन इसी जश्न के बीच दिल्ली की सड़कों, लाल बत्तियों और चौक-चौराहों पर कुछ मासूम हाथ ऐसे भी हैं, जिनके लिए तिरंगा सिर्फ देशभक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि घर की रसोई का सहारा है। हाथों में तिरंगा लिए ये बच्चे राहगीरों से झंडा खरीदने की अपील करते नजर आते हैं। उनके चेहरे पर मुस्कान जरूर है, लेकिन उस मुस्कान के पीछे घर चलाने की चिंता छिपी है।

सड़क किनारे खड़े इन बच्चों के लिए स्वतंत्रता दिवस कमाई का एक मौका लेकर आता है। वह सुबह से शाम तक चिलचिलाती धूप, ट्रैफिक और धुएं के बीच झंडे बेचते हैं। किसी के हाथ में छोटा तिरंगा है तो कोई कारों के शीशे पर दस्तक देकर बड़ा झंडा खरीदने की गुजारिश करता दिखाई देता है। हर बिकते झंडे के साथ उनके चेहरे पर उम्मीद की एक नई चमक आती है। कई बच्चे एक हाथ में झंडों का बंडल और दूसरे हाथ में पानी की बोतल लिए घंटों सड़क किनारे खड़े रहते हैं। लाल बत्ती होते ही उनकी नजर गाड़ियों के शीशों पर टिक जाती है। उन्हें पता है कि कुछ मिनट में जितने ज्यादा झंडे बिकेंगे, उतनी ही ज्यादा कमाई होगी।
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तिरंगा बिकेगा तो घर में दाल पकेगी
मुनिरका लाल बत्ती पर खड़े एक बच्चे ने मासूमियत से बताया कि हम झंडे बेचकर पैसे कमाते हैं। अगर झंडे बिकेंगे, तभी घर में दाल और रोटी बनेगी। बच्चे ने बताया कि वह सुबह से झंडे लेकर सड़क पर आ जाता है। सुबह कुछ लोग जल्दी में होते हैं, इसलिए झंडा नहीं लेते। लाल बत्ती पर गाड़ी रुकती है तो हम पास जाते हैं। कोई ले लेता है तो अच्छा लगता है। वहीं, कनॉट प्लेस पर झंडा बेच रहे राजीव ने बताया कि दिनभर में जितने झंडे बिकते हैं, उसी हिसाब से पैसे मिलते हैं। पैसे घर में दे देते हैं। घर वाले उससे सामान खरीदते हैं। झंडे नहीं बिकेंगे तो पैसे भी नहीं मिलेंगे।
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