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AIIMS: देश का सबसे बड़ा न्यूक्लियर मेडिसिन थेरेपी सेंटर तैयार, कैंसर मरीजों को मिलेगी राहत; कल नड्डा का दौरा

Fri, 14 Feb 2025 07:28 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मौजूदा समय में कीमोथेरेपी देकर इलाज किया जा रहा है। इसमें कीमो के साथ रेडिएशन भी दिया जाएगा जो ज्यादा सुरक्षित और असरदायक है।
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देश का सबसे बड़ा न्यूक्लियर मेडिसिन थेरेपी सेंटर तैयार - फोटो : aiims jhajjar
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विस्तार
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कैंसर के मरीजों के लिए राहत की बड़ी खबर। एम्स के राष्ट्रीय कैंसर संस्थान, (एनआईसी), झज्जर में देश का सबसे बड़ा न्यूक्लियर मेडिसिन थेरेपी सेंटर बनकर तैयार है। लाइसेंस लेने की प्रक्रिया की जा रही है। उम्मीद है कि इस सेंटर में मरीजों के लिए सुविधा जल्द शुरू हो जाएगी। इसके अलावा संस्थान में बोन मेरो ट्रांसप्लांट की सुविधा भी शुरू हो रही है।

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शनिवार को जेपी नड्डा करेंगे दौरा
दरअसल, शनिवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा दौरा करेंगे। इस दौरान उन्हें दोनों यूनिट दिखाई जाएगी। इन यूनिट के शुरू होने के बाद कैंसर के मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
 

20 बेड की होगी सुविधा
संस्थान से मिली जानकारी के मुताबिक, संस्थान में रेडियोआइसोटोप न्यूक्लियर मेडिसिन थेरेपी वार्ड बनकर तैयार है। इसे शुरू करने के लिए एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (एईआरबी) से लाइसेंस लेने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस वार्ड में 20 बेड की सुविधा होगी। यह देश का सबसे बड़ा सेंटर होगा। इसकी मदद से रेडिएशन देकर कैंसर का इलाज किया जाएगा। 

कीमो के साथ रेडिएशन भी दिया जाएगा
मौजूदा समय में कीमोथेरेपी देकर इलाज किया जा रहा है। इसमें कीमो के साथ रेडिएशन भी दिया जाएगा जो ज्यादा सुरक्षित और असरदायक है। यह मुख्य रूप से थायराइड, प्रोस्टेट, न्यूरो न्यूरोब्लास्टोमा सहित दूसरे कैंसर में इसका इस्तेमाल हो रहा है। आने वाले दिनों में स्तन कैंसर, ब्लड कैंसर सहित दूसरे कैंसर में भी इसका इलाज हो सकेगा। इसे लेकर बड़े स्तर पर शोध हो रहे हैं।
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सेंटर में मिलेगी बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा
संस्थान में जल्द बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा मिलेगी। यह सुविधा विकसित हो गई है। यह एक जटिल उपचार है। इसमें रोगग्रस्त बोन मैरो को स्वस्थ कोशिकाओं से बदल दिया जाता है। यह प्रक्रिया, रक्त कैंसर और रक्त विकारों के इलाज में मदद करती है। मौजूदा समय में यह सुविधा एम्स के मुख्य कैंपस में उपलब्ध है। इसकी जरूरत तब पड़ती है जब शरीर जरूरी रक्त कोशिकाएं नहीं बना पाता। इसकी जरूरत तब पड़ती है जब कीमोथेरेपी या विकिरण उपचार से कैंसरग्रस्त और स्वस्थ दोनों कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। सेंटर में इसके अलावा जीनोम सीक्वेंसिंग, रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू होगी।
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