दुनियाभर में महामारी का रूप ले चुका इबोला का पहला मरीज भारत में सामने आया है। रविवार को संदिग्ध मरीज का आरएमएल अस्पताल में हुए प्राइमरी टेस्ट एलिसा (इंजायम लिंक इम्यूनोसोरबैंट एस्सै) में रिपोर्ट पॉजिटिव है।
मरीज को डॉक्टरों की निगरानी में अस्पताल में रोक लिया गया है। दोबारा पॉलीमर्स चेन रिएक्शन (पीसीआर) टेस्ट के लिए उसका ब्लड सैंपल नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) भेज दिया गया है। इसकी रिपोर्ट सोमवार को आएगी।
नाइजीरिया से आई महामारी
आरएमएल अस्पताल में बनाए गए इबोला जांच केंद्र के नोडल अफसर डॉ. सुनील सक्सेना ने बताया कि शनिवार को एयरपोर्ट से एक संदिग्ध मरीज को यहां भेजा गया था। नाइजीरिया से आए इस मरीज की उम्र 76 साल है।
इन्होंने एयरपोर्ट पर जांच के दौरान सिरदर्द की शिकायत की थी। यहां डॉक्टरों की टीम ने एलिसा टेस्ट किया। रविवार को आई रिपोर्ट में इबोला पॉजिटिव मिला है।
ऐसे बचें वर्ना हो जाएंगे शिकार
डॉक्टरों ने नाइजीरियन मरीज को अस्पताल में रोक लिया है। उसका दोबारा ब्लड सैंपल जांच के लिए एनसीडीसी के अलावा पुणे में बनाए गए इबोला जांच केंद्र में भेज दिया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज की अगली रिपोर्ट आने तक उसे अस्पताल में रखा जाएगा।
बताया जा रहा है कि नाइजीरियन मरीज का भारत में पहले से ही किसी निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। चेकअप के लिए वह शनिवार को भारत पहुंचा था, लेकिन इबोला का शक होने पर उसे अस्पताल भेजा गया।
इबोला के लक्षण
. तेज बुखार, शरीर पर दाने निकलना।
. सिर दर्द, नाक से पानी आना।
. उल्टी, पेट में दर्द और पीठ के निचले हिस्से में दर्द।
. कंजेक्टिवाइटिस (आंख लाल होना)।
इबोला पर एम्स ने जारी की गाइड लाइन
इबोला वायरस से निपटने के लिए एम्स और स्वास्थ्य विभाग ने दिशा-निर्देश जारी किए है। कुछ दिन पहले एम्स और बीके अस्पताल में अन्य संक्रमण (डायरिया, वायरल, बुखार) के कुछ मरीज आए थे। ये मरीज इरान से आए थे, इन मरीजों के लिए यह अफवाह फैल गई थी कि इनमें इबोला वायरस के लक्षण पाए गए है।
एम्स और स्वास्थ्य विभाग के निर्देश अनुसार इबोला संभावित किसी भी मरीज को बीके अस्पताल रेफर नहीं किया जाएगा। पीड़ितों को दिल्ली एम्स, सफदरजंग, रोहतक, चंडीगढ़ रेफर किया जाएगा। इसके साथ ही संभावित या कंफर्म होने पर मरीज की पहचान को गुप्त भी रखा जाएगा।
एम्स अस्पताल से मिली जानकारी अनुसार इस घटना के बाद ओपीडी में आने वाले अधिकांश मरीज इबोला वायरस जांच की मांग कर रहे है। जबकि उसकी सुविधा अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। यही नहीं इबोला की पहचार संक्रमाण दो से तीन सप्ताह बाद होती है। यह बीमारी क्षेत्र प्रभावित होती है, स्वास्थ्य विभाग बीमारी को लेकर क्षेत्र को क्लीन चिट दे चुका है। बावजूद इसके लोगो में संक्रमण को लेकर भय है।
सिविल सर्जन डॉ. रामेंद्र सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग और एम्स के बीच संक्रमण को लेकर चर्चा हुई थी। जिसके बाद निर्देश जारी किए गए है। मरीजों से अपील है कि किसी भी संक्रमण के इबोला से न जोड़े।