पाकिस्तान में पोलियो के बढ़ते मामलों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। यह चिंता इसलिए भी है क्योंकि जिन देशों में पोलियो खत्म हो गया था, वहां एक बार फिर से मामले मिलने शुरू हो गए हैं।
इसका कारण उनके पड़ोसी देशों में बीमारी का खत्म नहीं होना माना जा रहा है। हाल ही में डीएम की अध्यक्षता में हुई टास्क फोर्स की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के तमाम अधिकारी मौजूद थे।
डॉ. नेपाल सिंह ने बताया कि पोलियो के लिए यूपी और बिहार काफी संवेदनशील रहे हैं। मेडिकल टूरिज्म और रिश्तेदारों से मिलने के लिए दिल्ली, गुड़गांव, नोएडा और गाजियाबाद समेत यूपी में बड़ी संख्या में पाकिस्तानी परिवार यहां आते हैं।
उनके बच्चों के जरिये यहां वायरस आ सकता है। यही कारण है कि कुछ डॉक्टरों ने यहां आने वाले पाकिस्तानी बच्चों का टीकाकरण कार्ड चेक करने की भी मांग उठाई है।
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. नेपाल सिंह ने बताया कि 2010 में पाकिस्तान में पोलियो के 144 मामले थे जो 2011 में बढ़कर 198 हो गए। 2012 में पोलियो पर काबू हुआ और 58 मामले मिले लेकिन 2013 में मरीजों की संख्या बढ़कर 93 हो गई।
2014 में अगस्त तक 115 मामले मिले हैं। उन्होंने बताया कि सभी राज्यों में विश्व स्वास्थ्य संगठन की काम कर रही इकाइयां और टास्क फोर्स के लिए यह चिंता का विषय है। यही कारण है कि पाकिस्तान में केस मिलने पर पोलियो मुक्त घोषित भारत में अभियान जारी रहेगा।
हालांकि, राउंड धीरे-धीरे और कम होते चले जाएंगे। डॉ. नेपाल सिंह ने बताया कि 2009 में भारत में पोलियो के 741 रोगी थे। 2010 में यह संख्या घटकर 42 हो गई। 2011 में एक मरीज मिला था। इसके बाद अब तक एक भी रोगी प्रकाश में नहीं आया है।
यहां पोलियो के मामले मिल रहे हैं
पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नाईजीरिया, सोमालिया, इराक, कैमरून, सीरिया, इथोपिया।
2016 से बाई वैलेंट वैक्सीन
डॉ. नेपाल सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में अभी ट्राईवैलेंट वैक्सीन दी जा रही है लेकिन 2016 से बाई वैलेंट वैक्सीन पिलाई जाएगी। ट्राई वैलेंट वैक्सीन पोलियो के तीन वायरस पी-वन, पी-टू और पी-थ्री रोधी है। दुनिया से पी-टू खत्म हो चुका है। पी-वन और पी थ्री है। इसलिए बाई वैलेंट वैक्सीन दी जाएगी। 2017 से इंजेक्टेबल वैक्सीन की तैयारी है।