तनख्वाह आने के साथ ही बैंकों पर दबाव बढ़ गया है। पहले दिन बुधवार को प्रशासन और बैंकों के सभी दावे फेल हो गए। बैंकों और एटीएम में पैसा नहीं होने के कारण उनकी हालत खराब रही।
गुस्साए लोगों ने बुधवार को सात जगहों पर हंगामा किया। सिविल लाइन के आईसीआईसीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा बैंक में हंगामे के बाद आनन-फानन में पुलिस पहुंची और मामले को शांत कराया।
नोटबंदी के बाद अब सरकारी और निजी कंपनियों के कार्यरत लोगों की तनख्वाह देने का समय आ गया है। एक दिसंबर को सरकारी और अन्य निजी कंपनियों के लोगों की तनख्वाह आने पर और दबाव बढ़ना तय है।
बैंकों को समझ मेें नहीं आ रहा है कि आखिर अब क्या करें? वहीं, बैंकों के एक आंकलन के मुताबिक बीते आठ दिनों के मुकाबले एक दिसंबर से 70 फीसदी अधिक मांग होने की उम्मीद है।
बता दें कि जिले में सभी बैंकों और एटीएम के लिए कम से कम 3200 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। बुधवार सुबह से कई कंपनियों ने तनख्वाह बांटनी शुरू कर दी थी। तनख्वाह मिलने के बाद बड़ी संख्या में लोग नकदी निकासी के लिए बैंकों की तरफ पहुंचे।
जिसकी वजह से सभी बैंकों की व्यवस्था चौपट दिखी। बैंकों की तरफ से जो इंतजाम के दावे किए जा रहे थे, सब शून्य निकले। वहीं, अग्रणी बैंक के मैनेजर आरसी नायक का कहना है कि सभी बैंकों को सीधे भारतीय रिजर्व बैंक से बात करने के लिए कहा गया है। नए नोट की आपूर्ति के कहा गया है। करेंसी चेस्ट के बैंकों को भी दूसरे बैंकों की सहायता करने के आदेश दिए गए हैं।आज बढ़ेगा अतिरिक्त दबाव
बृहस्पतिवार को सभी सरकारी दफ्तरों में कार्यरत क्लास-1 से क्लास-4 तक और संविदा में कार्यरत कर्मचारियों की तनख्वाह आएगी। इसके अलावा अधिकतम कंपनियों की तनख्वाह भी एक तारीख शाम तक अकाउंट में डाल दी जाएगी।
आठ नवंबर के बाद मचे हाहाकार के बीच पहली बार तनख्वाह आ रही है। इस वजह से बृहस्पतिवार व शुक्रवार को अतिरिक्त दबाव बढ़ेगा, लेकिन बुधवार तक कोई अतिरिक्त इंतजाम नहीं किए गए हैं।