प्रदूषण की वजह से दिल्ली में इस वर्ष गंभीर श्रेणी को लेकर खराब स्थिति रही है। इस साल 24 दिन गंभीर श्रेणी के दर्ज किए गए हैं, जबकि पिछले वर्ष सिर्फ 15 दिन ही गंभीर श्रेणी के रहे थे। वहीं, राहत की बात यह है कि बिना संपूर्ण लॉकडाउन के इस साल 196 दिन ऐसे दर्ज किए गए हैं जब वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 से कम रहा है। वर्ष 2020 में लॉकडाउन के कारण साफ और संतोषजनक श्रेणी के 95 व औसत श्रेणी के 127 दिन दर्ज हुए थे।
साल में सिर्फ एक दिन साफ हवा में लोगों ने ली सांस
प्रदूषण को लेकर इस साल दिल्ली की स्थिति इतनी खराब रही कि सिर्फ एक दिन ही दिल्ली वालों ने साफ हवा मे सांस ली। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक, इस वर्ष 18 अक्तूबर को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 48 पर पहुंचा था जो कि साफ श्रेणी में माना जाता है। इसकी प्रमुख वजह लगातार बारिश थी जिसकी वजह से वायु गुणवत्ता के आंकड़ों में गिरावट दर्ज की गई थी। सीपीसीबी के मुताबिक, 0-50 एक्यूआई साफ श्रेणी के लिए, 50 से 100 संतोषजनक, 100-200 औसत, 200-300 खराब, 300-400 बहुत खराब और 400 से 500 गंभीर श्रेणी में माना जाता है।
इस साल पांच दौर में गंभीर रही हवा की हालत
इस साल गंभीर श्रेणी को लेकर दिल्ली वालों ने पांच दौर को देखा और 24 दिन गंभीर दर्ज किए गए हैं। इससे पहले 2019 में भी 24 दिन गंभीर रहे थे। पहले दौर के तहत 14 जनवरी से लेकर 16 जनवरी तक लगातार गंभीर श्रेणी की हवा रही। इस माह कुल 11 दिन ऐसे रहे जब दिल्ली वालों ने दमघोंटू हवा में सांस ली। वहीं, दूसरा दौर नवंबर में दिवाली के बाद पांच नवंबर से शुरू हुआ और सात नवंबर तक चला व एक्यूआई 461 तक पहुंच गया। तीसरा दौर 11 नवंबर से शुरू हुआ और 13 नवंबर तक चला। इस बीच 12 नवंबर को दिल्ली का एक्यूआई 471 तक पहुंच गया था और दिल्ली में आपातकालीन जैसी स्थिति हो गई थी। इसी महीने में 25 नवंबर से चौथा दौर शुरू हुआ जो कि 28 नवंबर तक चला। इस महीने कुल 11 दिन बेहद खराब दर्ज किए गए। इसके बाद पांचवे दौर के तहत 21 दिसंबर से 26 दिसंबर तक लगातार छह दिन हवा गंभीर रही।
| श्रेणी |
2021 (दिन) |
2020 (दिन) |
| साफ से लेकर संतोषजनक |
72 |
95 |
| औसत |
124 |
127 |
| खराब |
80 |
76 |
| बहुत खराब |
63 |
48 |
| गंभीर |
24 |
15 |