केंद्र सरकार-उपराज्यपाल के साथ लड़ाई के बीच बजट में घोषित योजनाओं को अमली जामा पहनाने में सरकार पिछड़ रही है। इसका खुलासा शुरुआती पांच महीने के योजनागत बजट खर्च के आंकड़ों से हुआ है।
सरकार ने योजनाओं पर 19 हजार करोड़ रुपये खर्च प्रावधान की घोषणा की थी लेकिन 31 अगस्त तक महज 3301 करोड़ रुपये की राशि ही खर्च हुई है जो प्रावधान का 17.4 फीसदी है। यह पिछले साल के मुकाबले करीब 6 फीसदी कम है।
सरकार के आंकड़े बताते हैं कि जहां सरकार योजनामद खर्च में पिछड़ रही है तो गैर योजना मद का खर्च तेजी से बढ़ा है। गैर योजना मद में सरकार ने पिछले साल के मुकाबले 29 फीसदी राशि अधिक खर्च की है।
होने थे खर्च 11 हजार, हुए 8 हजार
सरकार ने 31 अगस्त तक जो 11,662 करोड़ रुपये खर्च किए हैं उनमें करीब 8400 करोड़ गैर योजना मद में हैं। जिसमें कर्मचारियों के वेतन, सरकार के विज्ञापन, स्टेशनरी, कंप्यूटर व कार्यालय फर्नीचर खर्च, चाय नाश्ता जैसे खर्च शामिल हैं।
सूत्र बताते हैं कि गैर योजना मद खर्च में वृद्धि रोकने और योजना मद खर्च के प्रोजेक्ट पर ध्यान देने के निर्देश सभी विभागों को दिए गए हैं।
हालांकि सरकार के लिए राहत की बात यह है कि योजना और गैर योजना मद में सरकार ने जो 11, 662 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, उसके मुकाबले वसूली 13,147 करोड़ रुपये की हुई है। इससे सरकार के पास पिछले वित्त वर्ष के बचे हुए करीब 1500 करोड़ मिलाकर 3002 करोड़ रुपये खाते में अतिरिक्त पड़े हैं।
मेगा बजट की कर वसूली में पिछड़ी सरकार:
आप सरकार ने वर्ष 2015-16 का मेगा बजट पेश करके मोटा कर वसूली का लक्ष्य रखा था जिसमें सरकार पिछड़ गई है। पिछले साल 26,604 करोड़ रुपये की कर वसूली करने वाली सरकार ने 34,661 करोड़ रुपये कर से जुटाने का लक्ष्य रखा था लेकिन महज 11,522 करोड़ रुपये ही 31 अगस्त तक वसूल पाई है।
सरकार ने 30 फीसदी वृद्धि का लक्ष्य रखा था। वाहन कर, स्टॉम्प रजिस्ट्रेशन फीस, वैट, मनोरंजन, लग्जरी टैक्स के मामले में सबसे कम वृद्धि लक्ष्य से एक तिहाई से भी कम दर्ज की गई है।
हालांकि आबकारी कर वसूली में सरकार को लक्ष्य से अधिक कर मिला है आबकारी कर में सरकार ने 20फीसदी वृद्धि का लक्ष्य रखा था जो करीब 25 फीसदी वृद्धि हुई है।
केजरीवाल कई बार भाषण में कह चुके हैं कि व्यापारियों को फ्री छोड़ दो खजाना भर देंगे लेकिन वैट की वसूली में 31 फीसदी की बजाय 11 फीसदी की वृद्धि के साथ 7645 करोड़ रुपये ही आए हैं। वाहन कर का तो और बुरा हाल है।