शिक्षा का बाजारीकरण बंद कराएं शिक्षा मंत्री
उत्तरी दिल्ली नगर निगम की पूर्व मेयर प्रीती अग्रवाल ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मामला है कि कोरोना के संकट काल में भी स्कूल लोगों के साथ कोई सहानुभूति नहीं दिखा रहे हैं और किसी भी कीमत पर फीस वसूल रहे हैं। जो छात्र उनके यहां पहली कक्षा से लेकर आज तक पढ़ता रहा, उन्होंने उसे ऑनलाइन क्लास लेने पर रोक लगा दिया। उन्होंने कहा कि वे दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया से अपील करती हैं कि प्राइवेट स्कूलों को इस तरह की मनमानी करने पर रोक लगाएं। वे इसके लिए शिक्षा मंत्री को एक पत्र भी लिखेंगी।
तय हो स्कूल फीस के नये मानक
भारत अभिभावक संघ के अध्यक्ष प्रताप चंद्रा ने कहा कि स्कूलों की फीस स्कूल चलते रहने के दौरान उसके सभी खर्चों को मिलाकर होती है, लेकिन कोरोना संकट के कारण पिछले छह महीने से स्कूल नहीं चल रहे हैं। केवल ऑनलाइन क्लास के माध्यम से कक्षाएं चल रही हैं। ऐसे में स्कूल फीस का दोबारा निर्धारण होना चाहिए। इसके लिए वे अभिभावकों के साथ आगामी तीन सितंबर को दिल्ली सचिवालय का घेराव भी करेंगे।
स्कूल फीस के मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के सामने एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसकी सुनवाई न्यायमूर्ति पंकज कुमार जायसवाल और न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की अदालत में चल रही है। अदालत ने इस मामले के साथ प्राइवेट स्कूलों के एक अन्य मामले की सुनवाई करने का निर्णय लिया है जिसमें प्राइवेट स्कूलों ने यह मांग की है कि अभिभावकों को स्कूल फीस जमा करने के निर्देश दिए जाएं क्योंकि उन्हें भी शिक्षकों के वेतन सहित अन्य सेवाओं के भुगतान करने हैं।