इस संबंध में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर अनुज अग्रवाल ने बताया दिल्ली के बड़े अस्पतालों में से सफदरजंग अस्पताल में ही यह सुविधा हैं। इस पद्धति में बिना चीरा लगाए केवल तार डालकर लीवर का कैंसर, किडनी का कैंसर, ब्रेन स्ट्रोक, हड्डियों का कुछ कैंसर सहित अन्य बीमारियों का इजाल किया जा रहा है। इस तकनीक की मदद से मरीज सर्जरी के दौरान होने वाले चीरफाड़ से बच जाता है और वह जल्दी ठीक हो जाता है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ माह से अगर मरीज 24 घंटे में अस्पताल आ जाता है तो इस पद्धति से उसके दिमाग में हुए खून के थक्के को निकाल कर गंभीर होने वाले समस्या से बचाया जा सकता है। इसके अलावा पैरों की धमनियों में रुकावट को भी समय रहते दूर किया जा सकता है। जबकि इस समस्या के कारण कई बार पैर तक काटने की नौबत आ जाती हैं, लेकिन इस सुविधा के बाद मरीजों को काफी फायदा हुआ है।
शुरू हुई रेडियोलॉजी क्लीनिक
रेडियोलॉजी विभाग में रेडियोलॉजी क्लीनिक की शुरुआत हुई है। इसमें डॉक्टर जांच के साथ साथ इलाज भी कर रहे हैं। यह दिल्ली का पहला अस्पताल है जिसमें रेडियोलॉजी क्लीनिक की सुविधा मिल रही है। मरीज यहां प्रतिदिन आकर अपना उपचार करवा सकते हैं। डॉ. अनुज ने बताया कि अस्पताल में सोमवार को एंडोवैस्कुलर आईआर, मंगलवार को महिला इमेजिंग, बुधवार को गैस्ट्रो और गुरुवार को न्यूरो आईआर की ओपीडी होगी।
आरएमएल में कैंसर मरीजों के लिए शुरू हुआ पेन रिलीफ क्लीनिक
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के एनेस्थेसिया विभाग में कैंसर के मरीजों के लिए पैलिएटिव केयर और पेन रिलीफ क्लीनिक शुरू किया गया है। यहां पर मरीजों को दर्द कम करने की दवा के साथ मानसिक, शारिरिक और आध्यात्मिक तरीके से मदद भी की जाएगी। कैंसर मरीजों के लिए इस तरह का क्लीनिक शुरू करने वाला आरएमएल दिल्ली का तीसरा सरकारी अस्पताल बना है। इससे पहले एम्स और सफदरजंग अस्पताल में यह सुविधा उपलब्ध है।
इस क्लीनिक के संबध में डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर नंदिनी दुग्गल का कहना है कि डॉक्टर मरीज की शारीरिक पीड़ा के अलावा मानसिक पीड़ा के आधार पर उनकी काउंसलिंग भी करते हैं। कैंसर मरीजों को आखिरी स्टेज पर असहनीय दर्द होता है। ऐसे में यह क्लीनिक इनके दर्द को कम करने में काफी मददगार साबित होगा।
आरएमएल की एनेस्थेसिया विभाग की प्रमुख डॉक्टर एमडी कौर के मुताबिक मरीजों में दर्द की तीव्रता पता करने के लिए शून्य से 10 संख्या तक के एक स्केल का इस्तेमाल किया जाता है। दर्द मापने वाले विशेषज्ञ डॉक्टर इस स्कैल के आधार पर मरीजों से उनके दर्द की तीव्रता बताने के लिए कहते हैं।