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खुशखबरी: नए साल में पूरा होगा एक्सप्रेसवे पर आशियाने का सपना

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आने वाले साल में नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर आशियाने की चाहत पूरी हो सकती है। एनएसईजेड का प्रोजेक्ट फेल होने के बाद इस जमीन का लैंडयूज बदलकर उद्योग, व्यवसाय, शिक्षण संस्थान और रिहायश के प्रोजेक्ट लाने की तैयारी हो रही है।
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नोएडा फेज तीन में समाजवादी आवास योजना भी के तहत दो हजार फ्लैट बन रहे हैं। रियल एस्टेट से ऐसी कई उम्मीदें हैं, जिससे नोएडा में फ्लैट खरीदने वालों को सहूलियत मिलेगी।

उम्मीद 2016
1. समाजवादी आवास योजना के तहत सेक्टर-117, 118 व 122 में 2000 फ्लैट बन रहे हैं जो 2016 में बनकर तैयार होंगे। 1350 ईडब्ल्यूएस फ्लैट और 650 एलआईजी फ्लैट बनेंगे। ईडब्ल्यूएस फ्लैटों की कीमत 15 लाख रुपये और एलआईजी फ्लैटों की कीमत 30 लाख के करीब होगी।
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2. सेक्टर 145, 146, 147, 148, 155, 156, 157, 163, 164, 165 व 166 की एनएसईजेड की जमीन को अब मिक्सलैंड यूज में तब्दील किया जा रहा है। सेक्टर-145 में किसानों को पांच फीसदी आवासीय भूखंड और बाकी में ग्रुप हाउसिंग, मॉल, इंस्टीट्यूट व उद्योग लगेंगे।

3. बिल्डरों पर सरकारी अंकुश न होने से खरीदारों के साथ मनमानी करते हैं। समय पर कब्जा नहीं देते। भुगतान को लेकर आए दिन नोटिस भेजते रहते हैं। लेआउट कभी भी बदल देते हैं। अगर रियल एस्टेट रेगुलेटरी बिल अगले साल लागू हुआ तो खरीदारों के हित सुरक्षित हो सकेंगे।

4. ग्रेटर नोएडा वेस्ट में करीब तीन लाख फ्लैट बन रहे हैं। 2016 में अगले साल करीब एक लाख फ्लैट पर कब्जा खरीदारों को मिल जाएगा। 2015 में करीब 10 हजार फ्लैटों पर कब्जा मिल चुका है। लोग रहने लगे हैं।

5. नोएडा के फेज तीन के सेक्टरों 75, 76, 77, 78, 115, 119, 120, 121, 122 आदि में कई नए प्रोजेक्ट आने हैं, जिससे नोएडा में फ्लैट खरीदने वालों को और विकल्प मिल सकेंगे। इन सेक्टरों में कई प्रोजेक्ट तैयार हो चुके हैं। कब्जा भी मिलने लगा है।
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2015 के प्रॉपर्टी बाजार के प्रमुख घटनाक्रम

1. केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने ओखला पक्षी विहार से 10 किलोमीटर के दायरे को घटा दिया, जिससे एनजीटी के रोक के कारण करीब दो साल से अटके प्रोजेक्ट की रजिस्ट्री शुरू हुई। फ्लैट खरीदारों को खुद के घर का मालिकाना हक मिला।

2. बिल्डरों पर ग्रुप हाउसिंग व वाणिज्यक भूखंडों का 20 हजार करोड़ रुपये बकाया है, जिसे वसूलने के लिए प्राधिकरण से नोटिस आते रहे। इससे फ्लैट संपत्ति खरीदारों में अनिश्चितता की स्थिति बनी रही।

3. नोएडा प्राधिकरण के निलंबित चीफ इंजीनियर यादव सिंह की सीबीआई जांच में कई बिल्डरों के नाम सामने आए। उनको नोटिस थमाए गए। इससे भी संपत्ति खरीदारों में उलझन की स्थिति बनी रही।

4. रिजर्व बैंक ने साल में कम से कम दो बार रेपो रेट में कमी की, जिसका फायदा खरीदारों को मिला। ब्याज घटने से किस्त कम हुई। संपत्ति के खरीदारों को किस्त भरने में सहूलियत मिली।

5. रियल एस्टेट में पूरे साल मंदी छाई रही। हजारों फ्लैटों को खरीदार नहीं मिले। आयकर विभाग की सख्ती और अत्यधिक सर्किल रेट के कारण बाजार में खरीदार बहुत कम दिखे। इस कारण नए प्रोजेक्ट बहुत कम लांच हुए।
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