दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) ने लॉकडाउन में गायब हुए दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों की जानकारी हासिल करने और उन्हें वापस लाने के लिए कवायद शुरू की है। आयोग को चिंता है कि कहीं यह बच्चे बाल मजदूरी के चंगुल में ना फंस जाएं।
इसी सिलसिले में डीसीपीसीआर ने स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) की दो दिवसीय बैठक बुलाई थी। इस बैठक में एसएमसी का सदस्य होने के नाते शिक्षा निदेशालय, नगर निगमों और गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया था। इस दौरान एसएमसी के सभी सदस्यों की भूमिका और जिम्मेदारियों पर चर्चा हुई। साथ ही उनके मासिक लक्ष्य व कार्रवाई की एक स्पष्ट योजना बनाई गई।
एसएमसी के सदस्य अपने जिले में नवंबर के महीने में कम से कम ऐसे 250 छात्रों की तलाश करेंगे, जिन्होंने स्कूलों में दाखिला लिया है। लेकिन वे लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन कक्षाओं में 33 प्रतिशत से कम उपस्थित रहे या फिर उनकी शून्य रही। स्कूलों को उनके बारे में कुछ पता नहीं है। इसके अलावा एसएमसी के सदस्यों को कम से कम 100 नए बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराने का लक्ष्य सौंपा गया है।
इस बैठक के दौरान डीसीपीसीआर के अध्यक्ष अनुराग कुंडू ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन के बाद गायब हुए ऐसे लगभग 2 लाख बच्चों की पहचान करने की जरूरत है। जिनके बारे में स्कूलों को पता नहीं है।
उन्होंने कहा कि यूनिसेफ के मुताबिक भारत में प्राथमिक शिक्षा को पूरा करने से पहले ही 100 में से 29 छात्र स्कूल छोड़ देते हैं। अब महामारी के कारण स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या कई गुना बढ़ सकती है। जिसके कारण बाल श्रम में वृद्धि होने की संभावना है। ऐसे में डीसीपीसीआर को इन दोनों समस्याओं से निपटने के लिए कई उपाय करने होंगे।