प्रत्याशियों का वादे और इरादों को लोग देख चुके हैं, अब मतदान की बारी है। 2014 के लोकसभा चुनाव में गाजियाबाद के सिर्फ 57 फीसदी मतदाताओं ने ही वोट डालकर अपनी जिम्मेदारी निभाई, 43 फीसदी मतदाता घरों से नहीं निकले। अपनी पसंद का सांसद चुनने में भी उन्होंने दिलचस्पी नहीं दिखाई। खासतौर से टीएचए की कॉलोनियों में मतदान बेहद कम रहा। साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र के एक बूथ पर सिर्फ 18 फीसदी मतदान हुआ था। यह चुनाव सिर्फ सांसद चुनने तक सीमित नहीं है, यह चुनाव और आपका वोट तय करेगा कि देश का प्रधानमंत्री कौन होगा। ऐसे में किसी के भी पक्ष में करें, लेकिन मतदान जरूर करें।
आंकड़े बताते हैं कि बीते लोकसभा चुनावों में 117 बूथों पर 50 फीसदी से कम वोट पड़े थे। वहीं शहर विधान सभा क्षेत्र के 60 बूथों पर वर्ष 2014 में 45 फीसदी से कम मतदान हुआ था। टीएचए की बहुमंजिला इमारत वालें क्षेत्रों के बूथों पर सबसे कम मतदान हुआ था। साहिबाबाद विधानसभा के नंदग्राम स्थित एक बूथ पर महज 18 फीसदी मतदान हुआ था। इसी विधानसभा के 73 बूथ ऐसे थे जिन पर 40 फीसदी से कम मतदान हुआ था और मतदाताओं की इसी उदासीनता की वजह से लोकसभा क्षेत्र में महज 57 फीसदी मतदान हो सका था। निर्वाचन आयोग और जिला निर्वाचन अधिकारी के तमाम प्रयासों के बावजूद मतदान के प्रति लोगों में ज्यादा उत्साह नहीं दिखा।
देश के निर्माण के लिए जरूर करें मतदान
समाजशास्त्रियों के मुताबिक आजादी के बाद शुरूआती दौर में होने वाले चुनाव में लोग मतदान में बढ़ चढ़कर भाग लेते थे। वह अच्छे लोगों को चुनकर संसद में भेजते थे। धीरे-धीरे लोगों में मतदान के प्रति उदासीनता आ रही है। देश के निर्माण के लिए लोगों को अच्छे लोगों को चुनकर संसद भेजना होगा और वह तभी संभव हो सकेगा जब अधिक से अधिक लोग मतदान प्रक्रिया में भाग लें।
6 हजार से ज्यादा मतदाताओं ने दबाया था नोटा
2014 में 6205 मतदाताओं को कोई भी प्रत्याशी पसंद नहीं आया था। इन मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया था। सबसे ज्यादा नोटा साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र में दबाया गया था। इस बार कई प्रत्याशी बदले हैं, ऐसे में माना जा रहा है कि नोटा का बटन दबाने वालों की संख्या इस बार कम रह सकती है।