आप नेता आशुतोष ने वित्त मंत्री अरुण जेटली मानहानि मामले में उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें जेटली द्वारा पेश अतिरिक्त साक्ष्यों को रद्द करने से इंकार कर दिया गया था। आशुतोष ने कहा कि एक बार मुख्य याचिका दायर करने के बाद नए आरोप दायर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी ने 29 अप्रैल को दिए फैसले में जेटली द्वारा दायर मानहानि की मुख्य याचिका के बाद पेश अतिरिक्त साक्ष्यों को स्वीकार करने के खिलाफ दायर याचिका को स्वीकार करने से इंकार कर दिया था।
हालांकि अदालत ने इस मामले में प्रतिवादी बनाए गए मुख्यमंत्री केजरीवाल, आशुतोष व अन्य को अपना पक्ष रखने का मौका प्रदान कर दिया था।
अब दूसरी खंडपीठ के समक्ष होगी सुनवाई
आशुतोष के साथ केजरीवाल
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आशुतोष की याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति आर के गाबा के समक्ष तय थी, लेकिन खंडपीठ ने अज्ञात कारणों से सुनवाई से इंकार कर दिया। अब बृहस्पतिवार को सुनवाई दूसरी खंडपीठ के समक्ष होगी।
केजरीवाल, आशुतोष व अन्य आप नेताओं ने इससे पूर्व तर्क रखा था कि जो नए साक्ष्य व आरोप लगाए गए हैं वे मुख्य याचिका में नहीं हैं। उन्हें इस प्रकार से मुख्य याचिका के साथ पेश नहीं किया जा सकता। हमने मुख्य याचिका पर जबाव दे दिया है।
गौरतलब है कि अरुण जेटली ने डीडीसीए में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, आप नेता राघव चड्ढा,कुमार विश्वास, आशुतोष, संजय सिंह और दीपक वाजपेयी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। याचिका में उन्होंने इन सभी से 10 करोड़ बतौर मुआवजा दिलवाने की मांग की है।