दिल्ली सरकार विज्ञापन मामले में फंस गई है। सरकार के अधिवक्ता ठोस जवाब नहीं दे पाए। अदालत ने उनके रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा यह गंभीर मामला है और आम लोगों के धन को इस प्रकार से इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी जा सकती।
मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने दिल्ली सरकार के उस तर्क को खारिज कर दिया कि विज्ञापन देने के मुद्दे पर दिल्ली सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का कोई उल्लंघन नहीं किया।
अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया स्पष्ट है कि आप ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद पब्लिक फंड के मामले में उल्लंघन किया है।
अदालत ने सरकार को स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद दिए विज्ञापनों पर सरकार ने कितनी राशि खर्च की है। इसके अलावा विज्ञापनों पर खर्च राशि का स्रोत क्या है। अदालत ने मामले की सुनवाई 3 अगस्त तय की है।