यहां हाथों से निकले हुए शब्दों की ध्वनि आंखों से सुनी जाती है, ये बात सुनने में भले ही आपको अजीब लगे लेकिन, दिल्ली के बेहद व्यस्त इलाके में खुले इस कैफे में घुसते ही आपकी मुलाकात ऐसे शख्स से होगी जो न तो सुन सकते हैं और न ही बोल सकते हैं।
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यहां काम करने वाले सारे वेटर बोलने और सुनने में असमर्थ (मूक-बधिर)हैं। दक्षिणी दिल्ली के सत्या निकेतन इलाके के ‘इकोज कैफे’ की यही खास बात यहां आने वाले हर शख्स को इसका मुरीद बना देती है।
अपनी सीधी-सादी जिंदगी जी रहे पांच दोस्तों ने जब अपना स्टार्टअप शुरु करने का फैसला किया तो उनके दिमाग में बस एक ही बात थी कि वो व्यापार के साथ समाज के लिए भी कुछ करेंगे।
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इस तरह से बेजुबानों की जिंदगी को मिला रोजगार
इन दोस्तों ने दिया बेजुबानों को सहारा
- फोटो : अमर उजाला
गौरव, क्षितिज, शिवांश, साहिब और प्रतीक की उम्र 25 से 30 साल के बीच है। इनमें से गौरव, साहिब और प्रतीक एक ही कंपनी में काम करते हैं और एक ही कैब में ऑफिस आने जाने की वजह से इनकी रोज की मुलाकात जल्द ही दोस्ती में बदल गई।
पेशे से इंजीनियर और एक ही आईटी कंपनी में काम करने वाले इन दोस्तों ने तय किया कि वो अपना कैफे खोलेंगे जिसमें वो शारीरिक अक्षमता के शिकार लोगों को रोजगार देंगे।
प्रतीक ने होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर रेस्त्रां में काम करने वाले अपने भाई शिवांश से इस बारे में बात की। शिवांश को आइडिया पसंद आया। उन्होंने प्रतीक से कहा कि वो अपने बचपन के दोस्त क्षितिज के साथ मिलकर ऐसा ही कुछ करने की सोच रहे हैं।
कैफे में पांच वेटर हैं और सभी मूक-बधिर
इस तरह बन गया रेस्त्रां
- फोटो : अमर उजाला
क्षितिज भी होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर नौकरी कर रहे थे। इस तरह पांच दोस्?तों की टीम तैयार हुई और दिसंबर 2015 में इकोज कैफे शुरु हो गया। प्रतीक बताते हैं कि अपने कैफे के लिए उन्होंने घरवालों या किसी बैंक से कोई आर्थिक मदद नहीं ली बल्कि, पांचों ने नौकरी के दौरान अपनी बचत के पैसों से ही इसे खोलने का फैसला किया।
फिलहाल इस कैफे में इन पांच दोस्तों के साथ 16 लोगों का स्टाफ काम करता है जिसमें पांच वेटर हैं और सभी मूक-बधिर हैं। इसके बावजूद कस्टमर को रिसिव करने, ऑर्डर लेने और सर्व करने से लेकर बिल देने तक का सारा काम ये लोग बिना किसी की मदद के करते हैं।
इन वेटर्स के चेहरे पर हर वक्त मुस्कान रहती है और ये सब साइन लैंग्वेज को बोलने और समझने में समर्थ हैं। ग्राहकों को किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए हर टेबल के साथ एक इलेक्ट्रिक स्विच लगाया गया है।
इस खास टेक्नीक से दिया जाता है ऑर्डर
- फोटो : अमर उजाला
ग्राहक के स्विच दबाते ही रिसेप्शन पर लगा बल्ब जल जाता है जिससे वेटर को पता चलता है कि किस कस्टमर को उनकी जरुरत है या कोई ऑर्डर करना चाहता है।
जबकि ऐसे ग्राहक जो साइन लैंग्वेज नहीं समझते उनके लिए कैफे के मेन्यू में खास इंतजाम किया गया है। हर डिश के सामने उसका एक खास (दो अंकों वाला) कोड नंबर लिखा है जिसे ग्राहक ऑर्डर स्लिप यानी सादे कागज पर लिख कर वेटर को देता है।
वेटर को पता चल जाता है कि कस्टमर ने क्या ऑर्डर किया है। अगर किसी ग्राहक को क्लासिक इटालियानो पिज्जा का ऑर्डर देना है तो वो मेन्यू में डिश के सामने लिखे कोड नंबर को कागज पर लिख कर वेटर को देता है और उसका ऑर्डर उसे सर्व कर दिया जाता है।
इकोज रेस्त्रां में काम करने वाला वेटर
- फोटो : अमर उजाला
इकोज कैफे शुरु करने वाले पांच दोस्तों में से दो ने अपनी नौकरी छोड़ दी है जबकि, तीन नौकरी के साथ ही इस काम में भी हाथ बंटाते हैं।
इन्हें पता है कि हर इंसान में अच्छाई के साथ कुछ बुराई भी होती है इसलिए, वो बुराइयों को मुद्दा नहीं बनाते।
यही कारण है कि उनकी ये पार्टनरशिप जारी है और भविष्य में वो इकोज की चेन खोलने की योजना पर काम कर रहे हैं जिसमें वो ऐसे ही शारीरिक तौर से अक्षम लोगों को रोजगार देना चाहते हैं।