दिल्ली सरकार राजस्व वसूली में लक्ष्य से काफी पीछे चल रही है। राजस्व वृद्धि दर 30 फीसदी रखी थी लेकिन अभी तक 14.5 फीसदी वृद्धि दर ही सरकार हासिल कर पाई है। हालांकि योजनागत खर्च में पिछड़े विभागों की वजह से खजाने को राहत जरूर है।
गैर योजना बजट खर्च और योजना बजट खर्च को जोड़ने पर खजाने की हालत बजट प्रबंधकों को पतली लग रही है। यही वजह है कि स्माल सेविंग लोन 100 फीसदी लेने के लिए केंद्र सरकार को दिल्ली सरकार ने चिट्ठी लिख दी है।
सूत्रों के अनुसार 31 दिसंबर (9 महीने) तक दिल्ली सरकार की राजस्व वसूली 21,820 करोड़ रुपये पहुंची है जो लक्ष्य से 12839 करोड़ रुपये कम है। सरकार ने योजना और गैर योजना मद में 41,129 करोड़ रुपये खर्च का प्रावधान वित्त वर्ष 2015-16 केलिए रखा है।
दो हजार करोड़ रुपये के लिए केंद्र को चिट्ठी
सूत्र बताते हैं कि सरकार जिस हिसाब से कर वसूली में पिछड़ी है, अगर योजना मद का खर्च प्रावधान के अनुरूप होता तो खजाना समय से पहले ही खाली हो जाता। गैर योजनामद में सरकार को 22129 करोड़ रुपये खर्च करने हैं जिसका 66 फीसदी खर्च हो चुका है लेकिन योजना मद की राशि अभी तक सिर्फ 43 फीसदी राशि ही खर्च हुई है।
सरकार को बजट खर्च पूरा करने केलिए अलग-अलग तरह के कर से 34661 करोड़ रुपये जुटाने हैं। जिसके लिए पिछले वर्ष के मुकाबले 30.29 फीसदी वृद्धि दर जरूरी थी। नौ महीने गुजर गए हैं लेकिन वृद्धि दर 14.5 फीसदी ही रही है।
इसके अलावा स्माल सेविंग स्कीम से करीब एक हजार करोड़ रुपये का लोन आता है जिसे इस बार 100 फीसदी का विकल्प अपनाकर दो हजार करोड़ रुपये करने के लिए केंद्र सरकार के चिट्ठी लिखी गई है।
परिवहन विभाग की हालत बेहद खराब
दिल्ली सरकार की नवंबर तक राजस्व वसूली 12 फीसदी वृद्धि दर के साथ 18978 करोड़ रुपये थी लेकिन दिसंबर में राजस्व विभाग की वृद्धि दर बढ़कर 14.5 फीसदी तक पहुंच गया है। सबसे बड़ी वृद्धि संपत्ति रजिस्ट्रेशन और जमीन से मिलने वाले राजस्व में हुई है।
नवंबर में 2152 करोड़ रुपये का राजस्व था जो 2632 करोड़ रुपये पहुंच गया है। हालांकि यह विभाग भी लक्ष्य से काफी पीछे चल रहा है। राजस्व वसूली में वैट विभाग और परिवहन विभाग की हालत सबसे पतली है तो आबकारी विभाग की वसूली तेजी से बढ़ी है।
वैट वसूली अभी 14450 करोड़ रुपये हुई है जबकि मार्च तक 24 हजार करोड़ रुपये वसूली का लक्ष्य है। आबकारी विभाग को 4100 करोड़ राजस्व वसूली का लक्ष्य दिया गया है जो 31 दिसंबर तक 28 फीसदी वृद्धि दर के साथ 3039 करोड़ तक पहुंच गया है। आबकारी राजस्व को 20 फीसदी वृद्धि दर का लक्ष्य दिया गया था लेकिन इसकी वृद्धि दर 30 फीसदी से ऊपर पहुंचने की संभावना है।