हाईकोर्ट ने इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के कथित आतंकी अब्दुल वाहिद सिदीबप्पा की जमानत अर्जी पर नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याची ने सुनवाई में देरी को आधार बनाते हुए कहा कि उसे वर्ष 2016 में गिरफ्तार किया गया था और अभी तक आरोप भी तय नहीं हुए।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल एवं न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की खंडपीठ ने एनआईए को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न जमानत स्वीकार कर ली जाए। अदालत ने मामले की सुनवाई 6 मई तय की है।
आरोपी सिदिबप्पा के अधिवक्ता एमएस खान ने खंडपीठ के समक्ष तर्क रखा कि उनका मुवक्किल बीते पांच साल से तिहाड़ जेल में बंद है। लगभग आठ साल पहले दर्ज किए गए इस मामले में अब उसे जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि अब तक आरोप तय नहीं हुए हैं और मुकदमे में कोई प्रगति नहीं हुई है। मामले में 363 गवाह हैं, ऐसे में ट्रायल में काफी समय लगेगा। इसलिए उसकी जमानत स्वीकार की जाए।
कर्नाटका के भटकल का रहने वाला सिदिबप्पा आइएम के सह-संस्थापक यासीन भटकल का भतीजा है। उसे दुबई से प्रत्यर्पण के बाद दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 20 मई, 2016 को गिरफ्तार किया गया था।
सितंबर 2012 में एनआइए द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार सिदिबप्पा पाकिस्तान की मदद से देश में फैले अन्य आइएम स्लीपर सेल के साथ मिलकर दिल्ली समेत देश के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर आतंकी हमलों की साजिश रच रहा था। उसकी कई प्रमुख इमारतों को बम से उड़ाने की योजना थी।
निचली अदालत ने 6 नवंबर, 2013 को सिदिबप्पा के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। वहीं 3 दिसंबर, 2013 को रेड-कार्नर नोटिस भी जारी किया गया था।