अवैध फ्लैटों को बनाकर बेचने के कारोबार को बैंकों ने भी खूब बढ़ावा दिया। शाहबेरी गांव की जमीन का अधिग्रहण रद होने के बाद भी यहां भूमि का उपयोग कृषि योग्य था, फिर भी दादरी तहसील कर्मियों की मिलीभगत से जमीन को पहले राजस्व की धारा 143 (गैर कृषि उपयोग भूमि) की गई और फिर यहां छह मंजिला भवन बनाने लगे। कुछ निजी बैंकों ने इनको लोन भी खूब दिया।
रद्द होने के बाद भी किसानों से नहीं लिए 110 करोड़
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 2008 में शाहबेरी गांव की जमीन का अधिग्रहण करने के दौरान किसानों को 110 करोड़ रुपए मुआवजा भी बांट दिया था, जिसे किसानों ने अब तक वापस नहीं दिया है। प्राधिकरण ने प्रयास भी किया, लेकिन किसानों के विरोध को देखते हुए प्राधिकरण पैसे वापस नहीं ले सका।