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जमीन अधिग्रहण रद्द होते ही शुरू हुआ अवैध कॉलोनियों का कारोबार, ग्रेनो प्राधिकरण ने बंद रखीं आंखें

Thu, 19 Jul 2018 09:57 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
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ग्रेनो प्राधिकरण ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट में सबसे पहले शाहबेरी गांव की जमीन का अधिग्रहण किया था। एनएच-24 व क्रॉसिंग रिपब्लिक से सटा होने के कारण सबसे इसकी अच्छी लोकेशन को देखते हुए प्राधिकरण ने यहां वर्ष 2008 में जमीन अधिग्रहण की थी लेकिन हाईकोर्ट से अधिग्रहण रद होने के बाद यहां अवैध कालोनियां का कारोबार शुरू हुआ, लेकिन प्राधिकरण ने इस ओर से आंखे बंद रखीं। अधिसूचित एरिया होने के बावजूद अवैध निर्माण होने दिया। गांव की करीब 156 हेक्टेयर जमीन में से अधिकतर पर कालोनियां बन चुकी हैं। ग्रेटर नोएडा शाहबेरी गांव की जमीन प्राधिकरण ने वर्ष 2008 में अधिग्रहण की थी।

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लेकिन जमीन अधिग्रहण के खिलाफ  किसान हाईकोर्ट चले गए जहां 12 मई 2011 को अधिग्रहण रद होने का आदेश हो गया। दरअसल, प्राधिकरण ने शाहबेरी गांव की जमीन 850 रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर पर अधिग्रहण की थी, लेकिन अर्जेंसी क्लॉज लगाकर जमीन अधिग्रहण किए जाने की वजह से हाईकोर्ट ने अधिग्रहण रद कर दिया। जमीन किसानों को वापस चली गई। इसके बाद किसानों ने कालोनाइजरों को सीधे जमीन बेचना शुरू कर दिया।

प्राधिकरण से अधिक रकम मिलने के कारण किसान भी जमीन बेचते चले गए। प्राधिकरण ने इस पर कार्र्रवाई नहीं की, जबकि प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में है और अधिग्रहण रद्द करते समय कोर्ट ने कहा भी था, अगर कि प्राधिकरण चाहे तो नए सिरे से अधिग्रहण प्रक्रिया कर जमीन ले सकता है। 2014 में यहां की जमीन का अधिग्रहण करने के लिए शासन को प्रस्ताव भी भेजा गया, लेकिन अब तक प्रस्ताव वहीं लटका हुआ है। दूसरी तरफ जिला पंचायत ने इसे और बढ़ावा दिया। उसने इन भवनों को बनाने के लिए नक्शे पास करने शुरू कर दिए, जबकिउसके अधिकार क्षेत्र में भी नहीं आता था। बाद में शासन से आदेश जारी कर इस पर रोक लगाया गया।  

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बैंकों ने भी दिया लोन 

अवैध फ्लैटों को बनाकर बेचने के कारोबार को बैंकों ने भी खूब बढ़ावा दिया। शाहबेरी गांव की जमीन का अधिग्रहण रद होने के बाद भी यहां भूमि का उपयोग कृषि योग्य था, फिर भी दादरी तहसील कर्मियों की मिलीभगत से जमीन को पहले राजस्व की धारा 143 (गैर कृषि उपयोग भूमि) की गई और फिर यहां छह मंजिला भवन बनाने लगे। कुछ निजी बैंकों ने इनको लोन भी खूब दिया।  

रद्द होने के बाद भी किसानों से नहीं लिए 110 करोड़  
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 2008 में शाहबेरी गांव की जमीन का अधिग्रहण करने के दौरान किसानों को 110 करोड़ रुपए मुआवजा भी बांट दिया था, जिसे किसानों ने अब तक वापस नहीं दिया है। प्राधिकरण ने प्रयास भी किया, लेकिन किसानों के विरोध को देखते हुए प्राधिकरण पैसे वापस नहीं ले सका।  
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