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नोएडा में किराए पर रहते हैं तो जरूर पढ़ें ये खबर

Thu, 28 May 2015 04:43 PM IST
सौरभ श्रीवास्तव/अमर उजाला, नोएडा
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प्रदेश में गौतमबुद्धनगर पहला जिला होगा, जहां रहने वाले प्रत्येक किराएदार का बायोमेट्रेकि डॉटा पुलिस के पास होगा। पुलिस लगभग जिले के पांच लाख किराएदारों का डाटा ऑनलाइन कर देगी।
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जिससे प्रत्येक थाने व डीसीआरबी (डिस्ट्रिक्ट क्राइम रिकार्ड ब्यूरो) के पास उनकी पूरी सूची होगी। बायोमेट्रिक डिवाइस के जरिए पुलिस किराएदारों के अंगूठे व अंगुलियों के निशान स्टोर कर लेगी। ऐसे में किराएदारों के नाम, मूल निवास पते व उसके बायोडॉटा के साथ-साथ पुलिस के पास बायोमेट्रिक डाटा भी होगा।

जिससे भविष्य में कोई भी क्राइम कर बदमाश फरार भी हो जाता है तो क्राइम स्पॉट से एकत्र किए फिंगर प्रिंट्स को पुलिस के पास एकत्र बायोमेट्रिक डाटा से मैच आसानी से किया जा सकेगा।
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जानिए क्यों उठाया गया ये कदम ?

इतना ही नहीं पुलिस बायोमेट्रिक डाटा के जरिए उक्त किराएदारों पर नजर भी रख सकेगी, जिससे अगर वह किसी वारदात को अंजाम देते हैं तो उन तक पुलिस आसानी से पहुंच सकेगी।

हाल ही में एक्सप्रेसवे इलाके स्थित असगरपुर में कपिल नामक एक शख्स किराए पर रह रहा था। उसकी गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। पुलिस को छानबीन में पता चला कि वह पांच हजार का इनामी बदमाश था और वहां पर पिछले दो साल से किराए पर रह रहा था।

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अगर कपिल का वैरीफिकेशन कराया गया होता तो शायद वह पहले ही पकड़ में आ गया होता, या यहां से पलायन कर गया होता । ऐसे कई मामले हैं जिनमें किराएदारों द्वारा वारदात को अंजाम दिया जाता है।
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क्या है बायोमेट्रिक सिस्टम ?

बायोमेट्रिक दो शब्दों से मिलकर बना है। बायोस और मेट्रोन, बायोस का मतलब होता है जीवन संबंधित और मेट्रोन का अर्थ है माप करना।

इस तरह कहा जा सकता है कि बायोमेट्रिक विज्ञान की वह शाखा है, जिसमें हम किसी व्यक्ति विशेष के जीवन से संबंधित आंकड़ों का अध्ययन कर सकते हैं। इस तकनीक की मदद से व्यक्ति के अंगूठे, अंगुलियों के निशान और आवाज एवं आंखों की पुतलियों के आधार पर उसकी पहचान करता है।

उदाहरण के तौर पर, व्यक्ति की आवाज और उसके हस्ताक्षर बायोमेट्रिक तकनीक के बढ़ते उपयोग की सबसे बड़ी वजह आज के समय में व्यक्ति विशेष की पहचान से संबधित हो रहे अपराधों को रोकना है।

मकान और किराएदारों की पुलिस के पास जानकारी- शहर में कितने मकान हैं और किरायदारों की संख्या कितनी है। इसकी जानकारी पुलिस को नहीं है। यह मकान मालिकों की लापरवाही है जो किराएदारों का वैरीफिकेशन पुलिस से नहीं कराते हैं।

जबकि सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें किराएदार की जानकारी थानों में देना अनिवार्य है। इसी लापरवाही से आपराधिक तत्व वारदातों को जन्म देने से नहीं चूकते हैं। वहीं, घटना के बाद पुलिस अपराधियों को ढूंढती रह जाती है और अपराधी फरार हो जाते हैं। ऐसी घटनाओं के लिए मकान मालिक कम दोषी नहीं हैं।
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