फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अगर नहीं बनाया ये मास्टर प्लान तो 2050 में भी डूबती रहेगी देश की राजधानी दिल्ली

Mon, 20 Jul 2020 04:48 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • शहरी मामलों के विशेषज्ञों की राय, दिल्ली-एनसीआर बोर्ड गठित कर दें विकास और प्लानिंग के पूरे अधिकार            
  • दिल्ली के पास ढांचागत विकास के लिए नहीं है जमीन, अवैध कालोनियां विकास में सबसे बड़ी बाधा  
  • 2041 के मास्टर प्लान की योजना जारी, लेकिन अपेक्षाओं पर खरा उतरने से हो सकता है दूर
विज्ञापन
Minto Road Delhi Rain - फोटो : PTI (File)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली हो या मुंबई, पटना हो या वाराणसी, हल्की-फुल्की बारिश भी हमारे शहर झेल नहीं पाते। थोड़ी सी बारिश में ही ये डूबने लगते हैं। इसके लिए इन शहरों में बेतरतीब बढ़ती आबादी और उसके अनुसार ढांचागत विकास न होने को जिम्मेदार ठहराया जाता है, शहरों के कमजोर ड्रेनेज सिस्टम पर सवाल उठाए जाते हैं।
विज्ञापन


लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के ढांचागत विकास के लिए अब दिल्ली जैसे शहरों के अंदर जमीन शेष नहीं बची है। अगर सही रणनीति बनाकर दिल्ली-एनसीआर बोर्ड के जरिए अभी से 2050 की योजना पर काम नहीं किया गया, तो आने वाले सालों में भी देश की राजधानी दिल्ली इसी तरह डूबती रहेगी और इस बीमारी का कोई इलाज नहीं मिलेगा।

क्या है समस्या

दिल्ली की आबादी अब लगभग दो करोड़ के आसपास पहुंच गई है। जगह के अनुपात में यह बहुत ज्यादा है, इसके लिए ढांचागत सुविधाओं का विकास किया जाना चाहिए। लेकिन सच्चाई यह है कि दिल्ली के पास बेहद कम मात्रा में जमीन है, जिस पर अब किसी तरह का ढांचागत विकास किया जा सकता है।

दिल्ली की जमीन का एक बड़ा हिस्सा यमुना बाढ़ क्षेत्र, लुटियन क्षेत्र, ऐतिहासिक इमारत क्षेत्र, वन क्षेत्र और सैन्य गतिविधयों के कारण घिरा हुआ है। इन जगहों पर कोई नया स्थाई निर्माण नहीं किया जा सकता। इन क्षेत्रों को निकाल देने के बाद दिल्ली के पास बेहद कम भू-भाग बचता है जिस पर किसी तरह का ढांचागत विकास किया जा सके।       

अवैध कॉलोनियां बड़ी बाधा

दिल्ली में 1731 से अधिक अवैध कॉलोनियां हैं। ये ज्यादातर यमुना बाढ़ क्षेत्र, बड़े नालों के आसपास और सरकारी जमीन पर बसी हैं। इनके कारण नालों के अंदर कूड़े का भराव हो जाता है और वर्षा के जल का निकलना बेहद मुश्किल हो जाता है। इनके कारण भी इन इलाकों में कोई ढांचागत विकास भी नहीं किया जा सकता।

विज्ञापन


उलटे अब राजनीतिक कारणों से सभी सरकारें इन्हें वैध प्रमाणपत्र दे रही हैं, जिससे अब इन्हें इन जगहों से हटाया जाना संभव नहीं हो सकेगा। इसके आलावा किसानों की जमीनें, कृषि क्षेत्र होने के कारण दिल्ली में ढांचागत विकास के लिए कोई जगह नहीं बचती है।

दिल्ली को बचाने का क्या है उपाय

शहरी मामलों के विशेषज्ञ जगदीश ममगांई ने अमर उजाला से कहा कि दिल्ली के ऊपर आबादी का बड़ा बोझ है, लेकिन उसके पास ढांचागत विकास के लिए कोई जमीन नहीं है। यही कारण है कि केवल दिल्ली को दृष्टि में रखकर इसका उचित विकास नहीं किया जा सकता।

उनका कहना है कि दिल्ली को बाढ़ से बचाने के लिए अब दिल्ली-एनसीआर बोर्ड की कल्पना को साकार करना पड़ेगा। दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के आसपास के इलाकों को एक साथ लेकर एक विशेष बोर्ड का गठन करना पड़ेगा। इसी बोर्ड को पूरे एरिया के विकास की जिम्मेदारी देनी चाहिए, तभी 2050 के भविष्य की जरूरतों, चुनौतियों को ध्यान में रखकर इस इलाके का सही विकास किया जा सकेगा।

दिल्ली-एनसीआर बोर्ड को सभी प्रकार के अधिकार दिए जाने चाहिए, जिससे इसके कार्य में कोई राजनीतिक हस्तक्षेप न हो सके। अन्यथा बोर्ड एक योजना को पास करेगा, तो उसकी औपचारिक अनुमति के लिए संबंधित राज्य सरकार से अनुमति मिलने में ही बहुत समय निकल जाएगा और अपेक्षित लक्ष्य पूरा नहीं हो सकेगा।

इस तरह कम हो आबादी का दबाव

दिल्ली पर आबादी का दबाव कम करने के लिए रोजगार के अवसरों और बड़े-बड़े संस्थानों के दफ्तरों को एनसीआर एरिया में स्थापित किया जाना चाहिए। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद बेहतर विकल्प बन सकते हैं। इससे सभी क्षेत्रों का विकास होगा, योजनाओं में तेजी आएगी और एक जगह पर आबादी का दबाव कम होगा। इससे भी दिल्ली पर दबाव कम होगा।

चल रही है 2041 के मास्टर प्लान की योजना

दिल्ली की प्लानिंग के लिए 1962 में पहली योजना बनी थी। इसके बाद 1990 और 2007 में भी योजना बनी। इस समय 2041 की योजना पर काम चल रहा है। लेकिन अभी से इसकी सफलता पर सवाल खड़े होने शुरू हो गये हैं, क्योंकि विशेषज्ञ अभी से इसकी क्षमता को लेकर सवाल खड़े करने लगे हैं।

सीटीआई के चेयरमैन ब्रजेश गोयल ने कहा कि दिल्ली में भारी संख्या में व्यापारियों की आबादी रहती है, लेकिन 2041 के मास्टर प्लान में स्टोर हाउस बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया है। इससे व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ेंगी और यहां व्यापारिक गतिविधियां चलाना मुश्किल हो जाएगा।

विज्ञापन


उन्होंने शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी को एक पत्र लिखकर मास्टर प्लान की कमियों पर चर्चा का आग्रह किया है।  

 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें