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दिल्ली विधानसभा चुनावः रण में हाथी ने बढ़ाया पांव तो बड़ी पार्टियों पर संकट

Thu, 23 Jan 2020 03:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
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बसपा
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में जहां भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है। वहीं, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का सियासी गणित भी अहम है। दिल्ली के रण में यदि हाथी की चाल बढ़ी तो इसका असर बड़ी पार्टियों पर पड़ना तय है। बसपा ने एक बार फिर दिल्ली की सभी 70 सीटों पर चुनावी जंग का एलान किया है।

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वर्ष 1993 से 2015 तक बसपा दो बार सभी सीटों पर अपने प्रत्याशियों को उतार चुकी है। 2008 के विधानसभा चुनाव में जब बसपा ने 70 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था तो रिकॉर्ड 8,67,672 वोट हासिल किए थे। दिल्ली में बसपा का ये अब तक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है। इस चुनाव में दो विधानसभा सीटों पर बसपा ने जीत भी हासिल की। हालांकि, 70 में से 49 प्रत्याशियों की जमानत भी इसी चुनाव में जब्त हो गई थी। 2015 का विधानसभा चुनाव में भी बसपा ने सभी सीटों पर लड़ा, लेकिन इस बार पार्टी का सबसे खराब प्रदर्शन रहा। उसे महज 1,17,093 वोट मिल पाए और 70 में से 69 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।

1993 के विधानसभा चुनाव से 2008 तक बसपा का वोट बैंक कई गुना रफ्तार से बढ़ा। 1993 में उसे 1.88 फीसदी वोट मिले, जबकि 1998 में इसका मत प्रतिशत दो गुना 3.90 तक पहुंचा। 2003 में 5.76 और 2008 में 14.50 फीसदी वोट हासिल किए, लेकिन इसके बाद बीते दो चुनाव में उसका ग्राफ तेजी से गिरा। अब जब बसपा सुप्रीमो मायावती अपने धुरंधरों के समर्थन में दिल्ली पहुंचेंगीं तो देखना ये होगा कि वे अपना खोया जनाधार वापस ला पातीं हैं या नहीं?
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दरअसल, दिल्ली के तीन कोनों में बसपा का भी दखल है। दक्षिणी दिल्ली के अलावा उत्तर पूर्वी और उत्तर पश्चिमी इलाकों में दलित वोटर भी खूब है। राजनीतिक पार्टियों के अनुसार, राजधानी की 70 में से करीब 10 से 12 विधानसभाएं ऐसी हैं जहां दलित वोटर 8 से 12 फीसदी के बीच है। 12 विधानसभाएं ऐसी हैं जो आरक्षित हैं। ऐसी स्थिति में यदि बसपा कुछ करिश्मा कर पाती है तो दिल्ली का मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।

साइकिल हो गई पंक्चर
दिल्ली की सियासी जंग में साइकिल पंक्चर हो चुकी है। कभी दिल्ली की दो दर्जन से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने वाली समाजवादी पार्टी (सपा) इस बार भी मैदान में नहीं उतरी। सपा ने वर्ष 2015 की भांति इस चुनाव में भी एक भी उम्मीदवार घोषित नहीं किया। हालांकि, एक भी चुनाव में सपा का दमदार प्रदर्शन नहीं रहा।

दिल्ली चुनाव में बसपा-सपा की स्थिति
साल     कुल सीट    बसपा लड़ी    वोट        फीसदी     सपा लड़ी      वोट          फीसदी
1993    70         55            66,796         1.88        26           17,717       0.50
1998    70         58            1,26,197        3.9        24           19,418       0.48
2003    70        40            2,59,905        5.76         39           29,224      0.63
2008    70        70            8,67,672        14.5         36           30,073      0.49
2013    70        69            4,20,926        5.35         25           17,042      0.22
2015    70        70            1,17,093        1.30        --              ---          ---
नोट : 2015 में सपा ने कोई प्रत्याशी चुनाव में नहीं उतारा था।

यूपी ही नहीं, हरियाणा-पंजाब ने भी काटी कन्नी
उत्तर प्रदेश की पहचान से जुड़े दो राजनीतिक दलों में से एक सपा के अलावा हरियाणा और पंजाब के दलों ने भी इस बार दिल्ली चुनाव से कन्नी काट ली है। भाजपा के साथ गठबंधन कर हरियाणा में सरकार बनाने वाली पार्टी जजपा ने अपने कदम पीछे कर लिए हैं। वहींइस बार शिरोमणि अकाली दल भी चुनाव नहीं लड़ रहा है। बाहरी और भीतरी दिल्ली की चुनिंदा सीटों पर चुनाव लड़ने वाली इन पार्टियों के शीर्ष नेता हर बार दिल्ली की गलियों में समर्थन मांगते दिखाई देते थे लेकिन त्रिकोणीय रण से बाहर होकर ये अब दर्शक दीर्घा में जा बैठे हैं। 

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