सोसाइटी ने अपने नोटिस में लिखा है कि झोलाछाप तो छोड़िए उनके पास कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें ऐसे डॉक्टर भी खुद को त्वचा रोग विशेषज्ञ बताकर इलाज कर रहे हैं जिनके पास इस विभाग की न तो डिग्री है और न अनुभव। नोटिस में लिखा गया है कि कोई भी एमबीबीएस करने वाला त्वचा रोग विशेषज्ञ नहीं होता। त्वचा रोग का उपचार करने वालों के पास एमडी (स्किन), डीएनबी, एफसीपीएस, डीवीडी, डीडीवी, डीडीवीएल, डीवीएल की जानकारी होनी चाहिए।
इस बारे में फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन के संस्थापक और त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मनीष जांगड़ा ने कहा कि खुद को ब्यूटीशियन और कोस्मेटोलोजिस्ट बताने वाले अधिकतर इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया अकाउंट को बंद करना चाहिए। इनमें से ज्यादातर लोग स्टेरॉयड वाली क्रीम बताते हैं, जबकि यह नुकसान पहुंचा सकता है। वहीं दिल्ली मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉक्टर गिरीश त्यागी का कहना है कि हमें कोई सोशल मीडिया पर बिना डिग्री के एलोपैथिक डॉक्टरी की प्रैक्टिस करता पाया गया तो हम उसपर कार्रवाई करेंगे। राम मनोहर लोहिया अस्पताल कर त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉक्टर भावुक धीर ने बताया कि कई इंस्टाग्राम अकाउंट ऐसे हैं जो फंगल संक्रमण में भी लोगों को स्टेरॉयड क्रीम लगाने के लिए कहते हैं जबकि इससे लोगों को राहत के बजाय नुकसान हो सकता है।