राजधानी दिल्ली में वाहनों के आवागमन के लिए 124 रास्ते हैं। आरएफआईडी टैग को अनिवार्य करने के बाद पुराने ट्रांसपोर्टर टोल टैक्स बचाने के लिए अब उन रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे राजस्व में होने वाले नुकसान और प्रदूषण पर शिकंजा कसने के लिए जल्द ही नौ और नए टोल प्वाइंट को आरएफआईडी की सुविधा से लैस करने पर विचार किया जा रहा है।
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रत करने और वाहनों के कारण जाम और देरी की समस्या से निपटने के लिए आरएफआईडी प्रणाली को लागू किया गया। लेकिन, चोर रास्ते से बचकर निकलने वाले वाहनों को भी टैक्स के दायरे में लाने के लिए दक्षिणी निगम ने एक बार फिर नए सिरे से तैयारियां शुरू कर दी है।
13 टोल प्वाइंट पर आरएफआईडी की सुविधा मुहैया करने में निगम को 60 करोड़ से अधिक का खर्च आया। नौ और नए टोल प्वाइंट को आरएफआईडी की सुविधा मुहैया की जाएगी ताकि वाणिज्यिक वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से रोका जा सके। अभी भी रोजाना 500 से अधिक वाहन इन रास्तों से निकलकर टोल टैक्स बचा रहे हैं।