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नए साल में हुड्डा सरकार ने मजदूरों के साथ किया धोखा

Thu, 02 Jan 2014 03:20 PM IST
ओम प्रकाश/ अमर उजाला, फरीदाबाद
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फरीदाबाद में निजी कंपनियों के श्रमिकों की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए हुड्डा सरकार ने उनका न्यूनतम वेतनमान न बढ़ाने का फैसला लिया है। इससे मजदूरों में खासी नाराजगी है।
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मजदूरों को उम्मीद थी कि नए साल से उनका न्यूनतम वेतन 5342 रुपये से बढ़कर 8100 रुपये हो जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सिर्फ सरकारी संस्थानों में काम करने पर यह नियम लागू होगा।

इस मसले पर श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शिवचरण लाल शर्मा भी सरकार से नाराज दिखे। शर्मा ने कहा कि वह मुख्यमंत्री से पूछेंगे कि जब निजी कंपनियों में 8100 रुपये न्यूनतम वेतन नहीं लागू करना था तो उन्होंने पहले ही इसे क्यों नहीं स्पष्ट किया। मुख्यमंत्री की रैली में हुई घोषणा के बाद मजदूरों ने उम्मीद लगा रखी थी।
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हिंद मजदूर सभा के जिला महासचिव आरडी यादव का कहना है कि इतनी महंगाई में श्रमिक 15 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की मांग कर रहे हैं। लेकिन उसका आधा वेतन भी नहीं दिया जा रहा। राज्य सरकार ने साल के पहले ही दिन श्रमिकों के साथ धोखा किया। जिसका खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ेगा।

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के प्रदेश सचिव बेचू गिरी का कहना है कि सरकार उद्योगपतियों के दबाव में झुक गई है। जब सरकार को आम श्रमिकों के लिए कुछ करना ही नहीं था तो पहले ही स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी।

तीन लाख मजदूर पाते हैं न्यूनतम मजदूरी

शहर में लगभग 4.5 लाख श्रमिक हैं, जिनमें से तीन लाख न्यूनतम मजदूरी पाने वाले बताए गए हैं। एस्कॉर्ट्स, व्हर्लपूल, टेकमसेह, शोवा, स्टार वायर, भारतीय कटलर हैमर, नॉर प्रेम्जे, टॉलब्रॉस, हाईपोलीमर लैब, गुड ईयर एवं यामहा मोटर जैसी बड़ी कंपनियों में भी अस्थाई श्रमिक न्यूनतम वेतन पर काम करते है।

सेवानिवृत्ति की उम्र भी नहीं बढ़ पाई

इससे पहले पिछले वर्ष सेवानिवृत्ति की उम्र 58 से 60 साल करने का फैसला भी उद्यमियों के दबाव में सरकार वापस ले चुकी है। अकेले फरीदाबाद औद्योगिक संगठन (एफआईए) ने इसके खिलाफ 400 आपत्तियां दाखिल की थीं। इसे लेकर भी श्रमिकों में सरकार के खिलाफ गुस्सा है।
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