अंधाधुंध विकास कार्यों की कीमत हरियाली को चुकानी पड़ रही है। पाली-अनखीर-प्रह्लादपुर चौक तक सड़क चौड़ीकरण के नाम पर 1426 पेड़ों की बलि चढ़ेगी।
वन विभाग ने इसकी भरपाई के लिए हुडा से जमीन देने और उसमें पौधे लगाने की शर्त रखी है। शर्त पूरी करने के बाद ही पेड़ कटेंगे।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जितने पेड़ कट रहे हैं, उससे पर्यावरण को होने वाली क्षति से बचाने के लिए 14 हजार से ज्यादा पौधे लगाने पड़ेंगे। इसके लिए उसे 7.45 हेक्टेयर जमीन चाहिए।
साथ ही हुडा को लगने वाले दस गुना पौधों के दस वर्ष के मेंटिनेंस के लिए 1.69 करोड़ रुपये भी देने होंगे। अभी तक हुडा अधिकारियों ने यह नहीं बताया है कि जमीन कब और कहां दी जाएगी।
क्या हैं नियम
वन एवं पर्यावरण मंत्रालय का नियम है कि अगर विकास कार्यों के नाम पर किसी भी प्रकार से पेड़ों को क्षति पहुंचाई जा रही है तो वह विभाग उसके एवज में दस गुना पौधों को लगाएगा। साथ ही उन पौधों को लगाने के लिए जमीन भी उपलब्ध कराएगा। यहीं नहीं उनकी देखरेख का खर्च भी अदा करेगा।
हुडा के कार्यकारी अभियंता, भूपेंद्र सिंह ने कहा कि वन विभाग के जो भी नियम हैं, उसे हुडा की ओर से पूरा किया जाएगा। वन अधिकारियों के साथ बातचीत में स्थिति को स्पष्ट करने के बाद उच्चाधिकारियों को वन विभाग की डिमांड भेजी जाएगी।
रोड चौड़ीकरण प्रोजेक्ट
पाली मोड़ से लेकर प्रहलादपुर तक 12.5 किलोमीटर सड़क 14 मीटर से बढ़ाकर 19 मीटर चौड़ी की जा रही है। हुडा को इस योजना पर 85.05 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। इस सड़क को बनने से शहरवासियों को दिल्ली जाने का बेहतर विकल्प मिलेगा।