नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर सुरक्षित सफर के लिए आईटीएमएस (इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) का ट्रायल शुरू हो चुका है। 15 जनवरी के बाद इसे पूरी तरह से लागू करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन आधी-अधूरी तैयारियों के साथ यह योजना सिरे कैसे चढ़ेगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
लगातार हुए हादसों के बाद पिछले माह ‘अमर उजाला’ ने एक्सप्रेसवे की खामियों को उजागर किया था। आईटीएमएस का ट्रायल शुरू होने पर उम्मीद जताई जा रही थी कि हालात कुछ सुधरेंगे, लेकिन जो हाल पहले थे, वहीं मंगलवार को भी दिखे। ट्रायल के दौरान इंटेलिजेंट ट्रैफिक में कई अड़चनें दिखाई दीं। पेश है एक्सप्रेसवे की हकीकत को बयां करती अमर उजाला संवाददाता योगेश शर्मा व फोटोग्राफर भव्य नरेश की रिपोर्ट...
बंद मिले वीएमएस बोर्ड
कोहरे, दुर्घटना या फिर डायवर्जन संबंधित जानकारी देने के लिए एक्सप्रेसवे पर 13 वीएमएस (वैरिएबल मैसेज साइन बोर्ड) लगाए गए हैं, लेकिन मंगलवार को कंट्रोल रूम और महामाया बालिका इंटर कॉलेज के सामने लगा बोर्ड बंद पड़ा था। जेपी अस्पताल के सामने लगा बोर्ड वाहन चालकों को गलत जानकारियां दे रहा था।
इस तरह से बनेगा ट्रैफिक इंटेलिजेंस सिस्टम
नोएडा से ग्रेटर नोएडा तक 24 ईसीबी (इमरजेंसी कॉल बॉक्स) लगाए गए हैं। आपात स्थिति में बॉक्स में लगा बटन दबाकर कंट्रोल रूम से संपर्क साधा जा सकता है।
ऐसे ही एक कॉल बॉक्स का बटन दबाने पर काफी देर तक घंटियां सुनाई देती रहीं। तीसरी बार कोशिश करने पर फोन तो उठा, लेकिन सुनने वाले के पास आवाज नहीं पहुंची।
यहां भी नेताजी की लहर
जहां करोड़ों रुपये खर्च कर एक्सप्रेसवे को इंटेलिजेंट बनाने की कोशिश की जा रही है, वहीं राजनीतिक पार्टियों से जुड़े लोग प्राधिकरण की मेहनत पर पानी फेरने का काम कर रहे हैं। वाहन चालकों की सुविधा के लिए लगाए गए दिशा सूचक बोर्ड नेताओं के होर्डिंग्स से अटे दिखाई दिए।
खुले पड़े हैं जानलेवा कट
एक्सप्रेसवे के कट हादसों को न्यौता दे रहे हैं। इन्हें बंद किए बिना इसको हाईटेक बनाने का सपना देखा जा रहा है। एडवेंट टावर के नजदीक सड़क के किनारे माहभर से गहरा गड्ढा खुदा हुआ है। इसके अलावा डिवाइडरों के बीच क्रेश बैरियर लगाने का काम पूरा नहीं हो पाया है।
एक्सप्रेसवे या आरामगाह
एक्सप्रेसवे पर 90 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन शायद इतने कैमरों से भी निगरानी नहीं हो पा रही है। रोड एक शख्स डिवाइडर पर बैठा आराम फरमा रहा था। डिवाइडरों से छलांग लगाकर सड़क पार की जा रही थी।
पुलिस की लापरवाही
एक्सप्रेसवे पर वाहनों को रोककर चेकिंग करना घातक साबित हो सकता है। इसके बाद भी क्यूआरटी नंबर-3 में तैनात पुलिसकर्मी लापरवाही का खुला खेल खेल रहे थे। सेक्टर-82 कट के पास क्यूआरटी नंबर-2 में तैनात एचसीपी साहब तो निजी सुरक्षा गार्ड से ही वाहनों की चेकिंग करा रहे थे।