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कैसे करेंगे पहचान, कौन सा फल खाने से रहेंगे स्वस्थ, कौन सा फल खाने से हो जाएंगे बीमार   

Mon, 27 Jul 2020 09:57 PM IST
Mohit Mudgal अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली   

सार

  • कच्चे फलों को पकाने लिए व्यापारी करते हैं कैल्सियम कार्बाइड का इस्तेमाल, इसके उपयोग से हो सकती हैं गंभीर बीमारियां
  • कैल्सियम कार्बाइड से फल पकाना देश-विदेश में है प्रतिबंधित, लेकिन फिर भी इस्तेमाल करते हैं व्यापारी
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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ताजे फल खाने से हमारा शरीर स्वस्थ और मजबूत रहता है, लेकिन आज के दौर में पेड़ों पर पके ताजे फल उपलब्ध नहीं होते। हमें बाजार में रसायनों से पकाए हुए फल खाने को मजबूर होना पड़ता है। इनसे शरीर को लाभ की जगह नुक्सान होने की आशंका ज्यादा होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर फलों को एथिलीन गैस से पकाया जाए तो इससे शरीर को प्राकृतिक रूप से पके फलों की तरह लाभ होता है और इससे कोई नुक्सान नहीं होता है, जबकि कैल्शियम कार्बाइड से पके फल खाने से अनेक गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

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कैल्शियम कार्बाइड जैसे रसायनों से से पके फल लोगों में अपच, उलटी करने की समस्या, अनिद्रा, याददाश्त को कमजोर बनाने से लेकर कैंसर पैदा करने का कारण तक बन सकते हैं। लेकिन आप यह कैसे पहचानेंगे कि कोई फल एथिलीन गैस से पका है या कैल्शियम कार्बाइड से? आज हम आपको बताते हैं कि यह समस्या कैसे दूर हो सकती है।  

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) के वैज्ञानिक डॉक्टर संजय सिंह ने अमर उजाला को बताया कि फलों के पकने के समय उनमें प्राकृतिक रूप से एथिलीन गैस का निर्माण होता है, लेकिन आज के व्यापारिक युग में फल दुनिया के एक कोने में पैदा किए जाते हैं तो दूसरे कोने में खाए जाते हैं। पके फलों को इतनी लंबी दूरी तक भेजना संभव नहीं है, लिहाजा कच्चे फलों को स्थानीय बाजार में ले जाकर उन्हें वहीं कृत्रिम रूप से पकाया और बेचा जाता है।

डॉक्टर संजय सिंह ने बताया कि आम, केले, सपोटा जैसे फलों को पकाने के लिए अब बिलकुल उन्नत विधि इस्तेमाल की जाती है। इसमें एक मैंगो राइपिंग चैम्बर बनाया जाता है। इस चैंबर में 150 पीपीएम  मात्रा में एथिलीन गैस का प्रवाह किया जाता है। इस दौरान 20-22 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 90-95 प्रतिशत आर्द्रता बनाए रखते हुए फलों को 48 घंटें में पका लिया जाता है। इस दौरान कार्बन डाई ओक्साआईड का जमाव नहीं होना चाहिए।

चूंकि इस विधि में उसी प्राकृतिक गैस एथिलीन का इस्तेमाल होता है जो पेड़-पौधे स्वयं अपने फलों को पकाने के लिए इस्तेमाल करते हैं, इसलिए इस विधि से तैयार फलों को खाने से किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है।

कैसे पहचानें

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डॉक्टर संजय सिंह के मुताबिक एथिलीन गैस से पके फल एक सामान रूप से पकते हैं, सभी तरफ उनका रंग एक सामान होता है। इन फलों की त्वचा में सिकुड़न नहीं होती है, जबकि कैल्शियम कार्बाईड से पके फल की त्वचा सिकुड़ी हुई होती है। ये फल सभी तरफ से एक सामान रूप से पके हुए भी नहीं होते। इनकी त्वचा चितकबरी होती है।

किन रसायनों से पकते हैं फल
फलों के पकने के समय प्राकृतिक रूप से उनमें मौजूद मेथियोनीन एमिनो एसिड से एथिलीन गैस बनने लगती है। यह एथिलीन गैस ही उन्हें पकाने के काम आती है। लेकिन फलों को कृत्रिम रूप से पकाने के लिए व्यापारी कैल्शियम कार्बाइड का सबसे ज्यादा उपयोग करते हैं क्योंकि यह उन्हें सबसे सस्ता पड़ता है। यह केंद्र और राज्य सरकारों के द्वारा प्रतिबंधित है, लेकिन जागरूकता और ज्ञान की कमी के कारण इसका उपयोग आज भी जारी है।

इसके अलावा फलों को पकाने के लिए एसीटीलीन, प्रोपाईलीन, ईथर, ग्लाइकोल, एथेन, एथेनोल, ओक्सीटोक्सिन और एथीफोन का उपयोग भी खूब किया जाता है। ये फलों के पकने की क्रिया को और अधिक तेज कर देते हैं।

कुछ फल तेजी से पकते हैं जिससे उनके जल्द न बिकने पर नुकसान का भी खतरा होता है। इससे बचने के लिए कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट, कैल्शियम क्लोराइड और कैल्शियम सल्फेट का उपयोग किया जाता है। इससे पकने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और उन्हें बेचने के लिए व्यापारियों को ज्यादा लंबा समय मिल जाता है। इन रसायनों का उपयोग भी मानव शरीर के लिए हानिकारक होता है।

कैसे पैदा होता है ये खतरा

स्वामी परमानंद प्राकृतिक चिकित्सा योग एवं अनुसंधान केंद्र के एमएस डॉक्टर अखिलेश अग्रवाल ने बताया कि आम कच्चे से लेकर पके फल के रूप में अनेक तरीकों से खाया जाता है। प्राकृतिक रूप से फलों के पकने समय उनमें एथिलीन (C2H4) गैस बनने लगती है, लेकिन व्यापारिक लाभ के लिए कच्चे फलों को तोड़कर उन्हें दूर-दराज क्षेत्रों तक भेजा जाता है जहां बाजार में बेचने से पहले गोदामों में उन पर कैल्शियम कार्बाइड छिड़ककर पकाया जाता है।

कैल्शियम कार्बाइड वेल्डिंग के काम के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जल के साथ मिश्रित होने पर यह एसिटीलिन गैस पैदा करता है जिससे कच्चे फल ज्यादा गर्मी से पीले पड़ जाते हैं। इनमें कुछ मात्रा में पके फल के गुण भी आ जाते हैं। सामान्य तौर पर हम इसे पका फल समझकर खाते हैं, लेकिन यह हमें नुकसान पहुंचाता है क्योंकि इस तरह पके दिखने वाले फल सही मायने में पके नहीं होते हैं।

विश्व में अपनाया जाता है यह सुरक्षित तरीका
अब फलों को प्राकृतिक गैस एथिलीन से पकाने को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए एथिलीन जनरेटर का इस्तेमाल किया जाता है। गोदामों में फलों को रखकर इस जनरेटर के जरिए एथिलीन गैस प्रवाहित की जाती है। इससे फल काफी हद तक प्राकृतिक अनुभव के साथ पकते हैं। यह विधि काफी प्रचलित हो रही है। लेकिन महंगी होने के कारण अभी भी भारत जैसे देशों में इसका प्रयोग बहुत कम हो रहा है।

फलों को पकाने के लिए एथेफोन को भी स्वीकार किया गया है। इसे जल से मिलाकर फलों पर छिड़काव करने से उसी प्रकार की एथिलीन गैस का निर्माण होता है जैसा कि प्राक्रतिक रूप से फलों के पकने के दौरान होता है। इस प्रकार इससे पके फल ज्यादा सुरक्षित हैं और नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। इसके आलावा शेपटा नाम के रसायन को भी फलों को पकाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

आम के लाभ
आम को फलों का राजा केवल इसलिए नहीं कहा जाता है क्योंकि यह बेहद स्वादिष्ट होता है, बल्कि ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पौष्टिकता और औषधीय गुणों से भरपूर होता है। आम का फल कच्चे, पक्के और सुखाकर कई रूप में किया जाता है।आम में विटमिन ए, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, विटामिन सी और विटामिन ई पाया जाता है। इस प्रकार यह शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता विकसित करता है और कोरोना जैसे संक्रामक रोगों से लड़ने की ताकत देता है। पके आम का गूदा दही के साथ मिलाकर खाने से पेट को ठंडक मिलती है, पाचनविकार दूर होते हैं और पाचनशक्ति बढ़ती है। यह बड़ी आंत में लाभकारी बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करता है जिससे पेट संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। आम की गुठली का पाउडर खाने से बवासीर (पाइल्स) ठीक होता है। कच्चे आम का पना शरीर में लू नहीं लगने देता है।

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डाइबिटीज में बेहद कारगर होता है आम

आम का छिलका फाइबर युक्त होता है। थोड़ी मात्रा में आम का छिलका लगातार खाने से डाईबिटीज से लड़ने में मदद मिलती है। यह शरीर में इंसुलिन बनाने में भी मददगार साबित होता है जिससे रक्त में शर्करा का स्तर नियंत्रित करने में मदद करती है। आम का औसत ग्लाईसेमिक इंडेक्स 51 होता है जिसका अर्थ यह है कि कम मीठे आम फल को डाईबिटीज के मरीज भी खा सकते हैं।                            

अगर वजन कम करना है तो आम रामबाण की तरह काम कर सकता है। इसके लिए पूरे दिन में केवल आम फल का ही सेवन करना होता है। इसके आलावा किसी अन्य फल या किसी अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे जल्द से जल्द शरीर की अतिरिक्त वसा घटाने में भी मदद मिलती है।

यहां यह ध्यान रखना आवश्यक है कि आम का फल कभी भी भोजन के साथ नहीं खाना चाहिए। भोजन के साथ आम खाने से रक्त में शर्करा की मात्रा दोगुनी तक बढ़ सकती है। इसलिए भोजन करने से एक घंटे पहले या बाद तक आम फल नहीं खाना चाहिए। आम फल खाने के बाद पानी नहीं पीना चहिए और रात्रि के समय भी फल खाने को स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छा नहीं बताया गया है।

आम में विटामिन सी भी प्रचुर मात्रा में होता है, इसलिए आम खाने से त्वचा में निखार आता है। 

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