स्वामी परमानंद प्राकृतिक चिकित्सा योग एवं अनुसंधान केंद्र के एमएस डॉक्टर अखिलेश अग्रवाल ने बताया कि आम कच्चे से लेकर पके फल के रूप में अनेक तरीकों से खाया जाता है। प्राकृतिक रूप से फलों के पकने समय उनमें एथिलीन (C2H4) गैस बनने लगती है, लेकिन व्यापारिक लाभ के लिए कच्चे फलों को तोड़कर उन्हें दूर-दराज क्षेत्रों तक भेजा जाता है जहां बाजार में बेचने से पहले गोदामों में उन पर कैल्शियम कार्बाइड छिड़ककर पकाया जाता है।
कैल्शियम कार्बाइड वेल्डिंग के काम के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जल के साथ मिश्रित होने पर यह एसिटीलिन गैस पैदा करता है जिससे कच्चे फल ज्यादा गर्मी से पीले पड़ जाते हैं। इनमें कुछ मात्रा में पके फल के गुण भी आ जाते हैं। सामान्य तौर पर हम इसे पका फल समझकर खाते हैं, लेकिन यह हमें नुकसान पहुंचाता है क्योंकि इस तरह पके दिखने वाले फल सही मायने में पके नहीं होते हैं।
विश्व में अपनाया जाता है यह सुरक्षित तरीका
अब फलों को प्राकृतिक गैस एथिलीन से पकाने को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए एथिलीन जनरेटर का इस्तेमाल किया जाता है। गोदामों में फलों को रखकर इस जनरेटर के जरिए एथिलीन गैस प्रवाहित की जाती है। इससे फल काफी हद तक प्राकृतिक अनुभव के साथ पकते हैं। यह विधि काफी प्रचलित हो रही है। लेकिन महंगी होने के कारण अभी भी भारत जैसे देशों में इसका प्रयोग बहुत कम हो रहा है।
फलों को पकाने के लिए एथेफोन को भी स्वीकार किया गया है। इसे जल से मिलाकर फलों पर छिड़काव करने से उसी प्रकार की एथिलीन गैस का निर्माण होता है जैसा कि प्राक्रतिक रूप से फलों के पकने के दौरान होता है। इस प्रकार इससे पके फल ज्यादा सुरक्षित हैं और नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। इसके आलावा शेपटा नाम के रसायन को भी फलों को पकाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
आम के लाभ
आम को फलों का राजा केवल इसलिए नहीं कहा जाता है क्योंकि यह बेहद स्वादिष्ट होता है, बल्कि ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पौष्टिकता और औषधीय गुणों से भरपूर होता है। आम का फल कच्चे, पक्के और सुखाकर कई रूप में किया जाता है।आम में विटमिन ए, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, विटामिन सी और विटामिन ई पाया जाता है। इस प्रकार यह शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता विकसित करता है और कोरोना जैसे संक्रामक रोगों से लड़ने की ताकत देता है। पके आम का गूदा दही के साथ मिलाकर खाने से पेट को ठंडक मिलती है, पाचनविकार दूर होते हैं और पाचनशक्ति बढ़ती है। यह बड़ी आंत में लाभकारी बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करता है जिससे पेट संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। आम की गुठली का पाउडर खाने से बवासीर (पाइल्स) ठीक होता है। कच्चे आम का पना शरीर में लू नहीं लगने देता है।
आम का छिलका फाइबर युक्त होता है। थोड़ी मात्रा में आम का छिलका लगातार खाने से डाईबिटीज से लड़ने में मदद मिलती है। यह शरीर में इंसुलिन बनाने में भी मददगार साबित होता है जिससे रक्त में शर्करा का स्तर नियंत्रित करने में मदद करती है। आम का औसत ग्लाईसेमिक इंडेक्स 51 होता है जिसका अर्थ यह है कि कम मीठे आम फल को डाईबिटीज के मरीज भी खा सकते हैं।
अगर वजन कम करना है तो आम रामबाण की तरह काम कर सकता है। इसके लिए पूरे दिन में केवल आम फल का ही सेवन करना होता है। इसके आलावा किसी अन्य फल या किसी अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे जल्द से जल्द शरीर की अतिरिक्त वसा घटाने में भी मदद मिलती है।
यहां यह ध्यान रखना आवश्यक है कि आम का फल कभी भी भोजन के साथ नहीं खाना चाहिए। भोजन के साथ आम खाने से रक्त में शर्करा की मात्रा दोगुनी तक बढ़ सकती है। इसलिए भोजन करने से एक घंटे पहले या बाद तक आम फल नहीं खाना चाहिए। आम फल खाने के बाद पानी नहीं पीना चहिए और रात्रि के समय भी फल खाने को स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छा नहीं बताया गया है।
आम में विटामिन सी भी प्रचुर मात्रा में होता है, इसलिए आम खाने से त्वचा में निखार आता है।