. यहां लोगों को एकत्रित क्यों होने दिया गया था?
. पास में थाना होने के बाद भी पुलिस ने क्यों नजर नहीं रखी और जानकारी के बाद भी सख्त कदम क्यों नहीं उठाए?
. मेडिकल सुविधाएं देने के बावजूद लोग कैसे कोरोना की चपेट में आए गए?
. दिल्ली सरकार व एसडीएम ने समय से क्यों कदम नहीं उठाए?
. यहां से देश के हिस्सों में गए लोगों की जानकारी कैसे मिलेगी?
देर शाम निजामुद्दीन मरकज में विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम भी पहुंची। फिलहाल, निजामुद्दीन थाने से लेकर गालिब अकादमी तक के रास्ते को पूरी तरह सील कर दिया गया है। डॉक्टरों के लिए कैंप ऑफिस बना दिए गए।
दिल्ली सरकार ने पुलिस से तबलीगी जमात के आयोजकों के खिलाफ मामला दर्ज करने को कहा है। इसके तहत देर रात तक आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज कर सकती है।
दिल्ली सरकार का कहना है कि जमात के आयोजकों ने लॉकडाउन के तहत जारी निर्देशों का उल्लंघन करने के साथ बड़ी संख्या में लोगों की जान को भी संकट में डाला है। ऐसे में आयोजकों के खिलाफ आपराधिक मामला बनता है।
निजामुद्दीन में भीड़ एकत्र होने के मामले में पुलिस ने आयोजकों को नोटिस भेजकर जवाब-तलब किया है। आयोजकों ने पुलिस को बताया कि यहां पर जलसा पहले से ही चल रहा था। इस बीच 22 मार्च को प्रधानमंत्री ने जनता कर्फ्यू का आह्वान किया। उसका पालन करने के लिए लोग मरकज में ही रुक गए थे।
इसके बाद 23 मार्च को ही लॉकडाउन की घोषणा हो गई। उस दिन भी मरकज से से लोग बाहर नहीं जा सके। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने गृह मंत्रालय को रिपोर्ट भेज दी है। बताया जा रहा है कि निजामुद्दीन थाने के कई पुलिसकर्मी भी कोरोना संदिग्ध के दायरे में हैं।