राजकुमार शर्मा
पूर्वी दिल्ली। दिल्ली की बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त सफर की सुविधा का लाभ लेने के लिए जरूरी पिंक कार्ड अब महिलाओं के लिए परेशानी का सबब बनता दिख रहा है। कार्ड बनवाने के लिए शाहदरा और हसनपुर बस डिपो में रविवार को महिलाओं की लंबी कतारें लगी रहीं। कई महिलाएं सुबह छह बजे ही लाइन में लग गईं, लेकिन दोपहर तक उनकी बारी नहीं आई।
चार से पांच घंटे तक इंतजार के बावजूद कार्ड नहीं बन पाने से महिलाओं में नाराजगी दिखाई दी। कतार में छोटी बच्चियों के साथ आई महिलाएं और बुजुर्ग भी परेशान होते रहे। हसनपुर डिपो में हालात सबसे ज्यादा खराब रहे। यहां महिलाओं की कतार सैकड़ों मीटर तक पहुंच गई। पहले महिलाओं को कागज की पर्ची पर टोकन और नंबर दिया जा रहा था। इसके बाद नंबर आने पर उन्हें कार्ड बनवाने के लिए अंदर भेजा जा रहा था। दोपहर करीब दो बजे तक लगभग 250 महिलाओं को टोकन दिए जा चुके थे, जबकि कार्ड महज करीब 100 महिलाओं के ही बन पाए। ऐसे में बाकी महिलाएं अपनी बारी के इंतजार में लाइन में खड़ी रहीं।
कतार में लगीं गीतांजलि ने बताया कि वह एक दिन पहले भी पिंक कार्ड बनवाने आई थीं। कई घंटे लाइन में खड़े रहने के बाद भी उनका कार्ड नहीं बन सका। रविवार को वह फिर करीब तीन घंटे से कतार में खड़ी थीं। उन्होंने कहा, सुबह से खड़े हैं, पता नहीं नंबर कब आएगा। बुजुर्ग राजकुमारी सुबह आठ बजे बहू के साथ पहुंची थीं। उम्र अधिक होने के कारण उन्हें लाइन में आगे कर दिया गया और उनका कार्ड बन गया, लेकिन बहू को अभी भी इंतजार करना पड़ा।
शाहीन ने बताया कि बस में सफर के दौरान उनसे पिंक कार्ड मांगा गया और जल्द बनवाने के लिए कहा गया। डिपो पहुंचने पर लंबी कतार देखकर उन्हें कई घंटे इंतजार करना पड़ा। महिलाओं की बढ़ती संख्या और सीमित कार्ड बनाने की क्षमता ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि रोजाना कितने कार्ड बनाए जा रहे हैं और महिलाओं को कार्ड के लिए इतना लंबा इंतजार क्यों करना पड़ रहा है।