चंद्रमोहन ने बताया कि 10 अक्तूबर 2016 को उसके भाई जॉनी की मौत हो गई थी। उसने पैरोल की मांग की थी लेकिन उसे पैरोल नहीं मिल पाई। चंद्रमोहन का कहना है कि आम बंदी अगर कोर्ट से पैरोल की मांग करे तो वकील से संपर्क, करने याचिका दाखिल करने और सुनवाई होने में कई बार इतना समय लग जाता है कि तब तक तेरहवीं भी हो जाती है।
उसके ही जैसे न जाने कितने आम बंदियों की यह समस्या है। चंद्रमोहन का कहना है कि हालांकि कुछ खास बंदी विशेष प्रयास कर पैरोल पाकर चले जाते हैं। इसके अलावा चंद्रमोहन ने कुछ बुजुर्ग बीमार बंदियों की रिहाई कराने के प्रयास शुरू करने की भी मांग की है।
हमारे पास जो भी पैरोल के लिए प्रार्थना पत्र आते हैं। उन्हें जिला प्रशासन को अग्रसारित कर दिया जाता है। कुछ बंदियों को पैरोल पर अंतिम संस्कार आदि में शामिल होने के लिए भेजा भी गया है। - विपिन कुमार मिश्र, जेल अधीक्षक, गौतमबुद्ध नगर जिला कारागार