दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार यूटी कैडर के मिजोरम में तैनात आईपीएस अफसर ने 29 नवंबर को सागरपुर- डाबड़ी इलाके में दबिश दी थी। इस अफसर ने द्वारका जिला पुलिस से सहायता मांगी थी। लेकिन ये नहीं बताया था कि वह खुद दबिश पर आए हैं। बाद में पता लगा कि आईपीएस अफसर दबिश में शामिल थे।
मिजोरम में तैनात यूपी कैडर के आईपीएस अफसर की दिल्ली में दबिश देने का मामला दिनों दिन तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में हुई पीसीआर कॉल पर देश के गृहमंत्रालय ने रिपोर्ट मांगी है। जांच में पता चला है कि आईपीएस अफसर ने उनके दिल्ली स्थित आवास पर तैनात दिल्ली पुलिस के जवानों व अर्टिगा कार का दबिश में इस्तेमाल किया।
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दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (लॉ एंड ऑर्डर जोन-1) डा. सागरप्रीत हुड्डा की देखरेख में दक्षिण-पश्चिमी जिले के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त कौशल सिंह मामले की जांच कर रहे हैं। दूसरी तरफ पीडि़त नाइजीरियन का अभी तक कुछ पता नहीं लगा है। वह अभी भी गायब हैं।
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार यूटी कैडर के मिजोरम में तैनात आईपीएस अफसर ने 29 नवंबर को सागरपुर- डाबड़ी इलाके में दबिश दी थी। इस अफसर ने द्वारका जिला पुलिस से सहायता मांगी थी। लेकिन ये नहीं बताया था कि वह खुद दबिश पर आए हैं। बाद में पता लगा कि आईपीएस अफसर दबिश में शामिल थे।
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साथ ही उन्होंने अपने दिल्ली आवास में तैनात दिल्ली पुलिस के जवानों का गैर कानूनी तरीके से दबिश में इस्तेमाल किया। ये भी बताया जा रहा है कि वह खुद वसंत विहार थाने भी गए थे और वहां से भी पुलिस सहायता मांगी थी।
जांच में ये बात सामने आई है कि दबिश के दौरान मिजोरम पुलिस ने जिस नाईजीरियन को उठाया था, उसे बाद में छोड़ दिया गया। ये भी बताया जा रहा है कि मिजोरम पुलिस ने नाइजीरियन युवक को दिल्ली में किसी अज्ञात जगह पर तीन दिन तक हिरासत में रखा।
नाइजीरियन के भाई ने 29 नवंबर को पीसीआर कॉल कर आरोप लगाया था कि मिजोरम पुलिस ने उसके भाई को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उससे 35 लाख रुपये ले लिए हैं और 20 लाख रुपये की मांग की जा रही है। नाइजीरियन युवक उस दिन से ही गायब है।
उसने मिजोरम की युवती से शादी की हुई है। पीड़ित के भाई ने जो पीसीआर कॉल की थी उसे केंद्रीय गृहमंत्रालय ने गंभीरता से लिया है और दिल्ली पुलिस आयुक्त संजय अरोड़ा से रिपोर्ट मांगी है।
मैं कप्तान हूं, अपने कप्तान से पूछ लेना
पुलिस सूत्रों का कहना है कि आईपीएस अफसर पुलिस सहायता लेने वसंत विहार थाने में गए थे। यहां पर उन्होंने कहा था कि वह कप्तान हैं और सहायता के लिए अपने कप्तान से पूछ लेना। यहां कप्तान से मतलब पुलिस उपायुक्त से है। बताया जा रहा है कि वसंत विहार थाना पुलिस से उनको पुलिस सहायता दी गई थी।
लोकेशन नोएडा में मिली
पुलिस को जांच में पता लगा कि जिस मोबाइल नंबर से पीसीआर कॉल की गई थी उसकी लोकेशन नोएडा आ रही थी। पता लगा है कि ये इस मोबाइल का सिम व मोबाइल सैट नया लिया गया है। इस मोबाइल से सिर्फ एक ही कॉल की गई है। पीसीआर कॉल होने के बाद से ही ये मोबाइल नंबर बंद है।