गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली हिंसा पर गुरुवार को राज्य सभा में सफाई दी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए प्रशासन ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की। इसके जिम्मेदार लोगों को कड़ा सबक सिखाया जाएगा। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने राहत देने का सवाल उठाने पर उन्होंने कहा कि हिंसा पीड़ितों को राहत पहुंचाने के मामले में दिल्ली सरकार अच्छा काम कर रही है।
केंद्र सरकार भी हिंसा पीड़ितों को राहत पहुंचाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखेगी। इसके लिए दोनों सरकारें मिलकर काम करेंगी। उन्होंने पीड़ित परिवारों को आश्वासन भी दिया कि उनके मजरिमों को बख्शा नहीं जाएगा, वे चाहे जिस भी धर्म के क्यों न हों।
लोकसभा में बोले थे गृहमंत्री
अमित शाह ने कहा कि हिंसा पीड़ितों की पहचान धर्म के आधार पर नहीं होनी चाहिए। हमें पूरी घटना को एक समग्रता में देखना चाहिए। किसी भी पीड़ित के साथ कोई अन्याय नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को शुरुआत से ही हिंसा के साथ जोड़ने की कोशिश की जाती रही है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि हिंसा में सबसे ज्यादा लोगों की जान तब गई, जब केंद्र में गैर भाजपा सरकारें थीं।
इसके पहले हिंसा के दौरान केंद्र के रुख पर कड़ा सवाल खड़ा करते हुए आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह ने कहा कि सरकार को इस बात का जवाब देना पड़ेगा कि हिंसा की शुरुआत में पुलिस और प्रशासन सुस्त क्यों दिखा? जब लोग मदद की अपील कर रहे थे उस समय पुलिस मदद के लिए क्यों नहीं पहुंची?
संजय सिंह ने हिंसा के मामले में सरकार पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव के पहले हिंसा की पटकथा लिखी गई और चुनाव के बाद दिल्ली में हिसा कराई गई। हिंसा में हिंदू-मुसलमान दोनों समुदाय के लोगों की जान गई, जबकि इस दौरान प्रशासन सोया रहा और गृहमंत्री ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि हिंसा के बाद भी अमित शाह पीड़ितों से मिलने नहीं गए।