पूर्णिमा पर मंगलवार को होने वाले चंद्र ग्रहण के कारण राजधानी में भी होली दहन के एक दिन बाद रंग खेला जाएगा। सोमवार को महिलाओं ने सुबह से ही अपनी संतान की रक्षा, सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना के लिए व्रत रखा। दोपहर बाद शुभ मुहूर्त में होली स्थल पर पहुंचकर कच्चे सूत से होलिका की परिक्रमा की, जल, रोली, अक्षत व नई फसल की बालियां अर्पित की और पूजन किया। ग्रामीण इलाके में महिलाओं ने गेहूं और चने की बालियां भूनकर प्रसाद के रूप में वितरित की।
विभिन्न मोहल्लों और कॉलोनियों में शाम होते-होते होलिका दहन की तैयारियां पूरी कर ली गईं। लकड़ी, उपले और सूखी टहनियों से सजीं होलिका को मंत्रोच्चार के बीच अग्नि दी गई। श्रद्धालुओं ने अग्नि की परिक्रमा कर परिवार की खुशहाली की कामना की। ग्रामीण इलाकों में इस अवसर पर अलग ही रंग देखने को मिला। महिलाएं समूह बनाकर पारंपरिक फाग और होली गीत गाते हुए पूजन स्थल तक पहुंचीं। कई गांवों में सामूहिक रूप से होली पूजन के बाद प्रसाद वितरण और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए।
होली मिलन में शामिल होंगे कई उद्योगपति और व्यापारी
दिल्ली में रह रहे राजस्थान के प्रवासियों की संस्था राजस्थान मिलेनियम क्लब की ओर से 4 मार्च को होली मिलन समारोह होगी। पिछले 25 वर्षों से कार्यरत इस संस्था से करीब 600 प्रतिष्ठित परिवार जुड़े हैं। संस्था के पदाधिकारियों ने विधायक अनिल शर्मा और नेहा अनिल शर्मा को कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया है। इसके अलावा हर्ष जिंदगर, कैलाश अग्रावाल, जितेंद्र अग्रवाल, महेंद्र बंसल शामिल रहेंगे। समारोह का मुख्य आकर्षण कवियत्री अनामिका जैन अंबर होंगी, जो अपने काव्य पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगी। क्लब में डॉक्टर, वकील, उद्योगपति और व्यापारी सहित विभिन्न क्षेत्रों के राजस्थानी प्रवासी शामिल हैं।
सावधानी के साथ होली पर रंगों से खेलें
होली का त्योहार रंगों और उल्लास का प्रतीक है, लेकिन जरा-सी लापरवाही से यह खुशी परेशानी में बदल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में मिलने वाले कई रंगों में हानिकारक रसायन मिले होते हैं, जो त्वचा एलर्जी, आंखों में जलन और बालों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए होली खेलने से पहले कुछ जरूरी सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। डॉक्टरों के अनुसार, होली खेलने से पहले शरीर पर सरसों या नारियल तेल लगा लें, ताकि रंग सीधे त्वचा में न समाए। चेहरे और हाथ-पैरों पर मॉइस्चराइजर या सनस्क्रीन का इस्तेमाल भी फायदेमंद रहता है। आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा पहनना बेहतर है और कॉन्टैक्ट लेंस लगाने से बचना चाहिए। रंग खरीदते समय हर्बल या प्राकृतिक रंगों को प्राथमिकता दें। गीले और पक्के रंगों से दूरी बनाए रखें। बच्चों को खासतौर पर केमिकल युक्त रंगों और पानी के गुब्बारों से बचाएं।
संतूर की तान से सजी, फूलों से महकी सांस्कृतिक संध्या
रवींद्र भवन में दिल्ली सरकार के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय दिल्ली कला उत्सव 2026 का समापन हुआ। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय सड़क परिवहन राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, संस्कार भारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री विजय कुमार और संस्कार भारती के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य अशोक तिवारी ने भारतीय संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया।
उत्सव में पंडित अभय रुस्तम सोपोरी ने राग भारतीय की नवीन प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं विधि शर्मा के होली गीतों ने समां बांध दिया। रंगमंच पर प्रदीप कुकरेजा की निर्देशित नाटक बेसहारा औरत को विशेष सराहना मिली। चारकुला आर्ट्स अकादमी की ओर से प्रस्तुत वृंदावन की फूलों की होली आकर्षण का केंद्र रही। संयोजन जयप्रकाश सिंह ने किया।
मैथिली-भोजपुरी और ललित कला अकादमी के सहयोग से हुए इस आयोजन में पुरानी दिल्ली के व्यंजनों और हस्तशिल्प का भी लोगों ने आनंद लिया। वहीं, अध्यक्ष प्रभात कुमार ने बताया कि अगले वर्ष इसे और भव्य रूप दिया जाएगा।
चंद्रग्रहण के दौरान कालकाजी मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खुलेगा
राजधानी में मंगलवार को होने वाले चंद्रग्रहण के दौरान जहां देशभर के अधिकांश मंदिरों के कपाट सुबह 6:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक बंद रहेंगे। वहीं राजधानी का प्राचीन सिद्धपीठ श्री कालकाजी मंदिर पूरे ग्रहणकाल में श्रद्धालुओं के लिए खुला रहेगा। मंदिर के महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया कि कालकापीठ मंदिर के 12 द्वार 12 राशियों के आधार पर स्थापित हैं और गर्भगृह में नवग्रह भी विराजमान हैं, जिनमें सूर्य और चन्द्र देव शामिल हैं। उनका कहना है कि जब राहु चन्द्रमा को ग्रसित करता है, तब मां कालका उनकी रक्षा के लिए अपने द्वार खुले रखती हैं और पुत्र स्वरूप चन्द्र देव की संरक्षण करती हैं। उनके अनुसार, मां कालका साक्षात काल की स्वामिनी हैं, इसलिए ग्रहणकाल में उनके दर्शन करने से भक्तों के कष्टों का निवारण होता है। मान्यता है कि इस अवधि में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।