मंगोलपुरी थाना क्षेत्र के एक पॉक्सो मामले में अदालत ने पुलिस की लापरवाही पर नाराजगी जताई है। अदालत पुलिस विभाग के दो अलग-अलग अधिकारियों द्वारा दाखिल की गई रिपोर्ट पर सुनवाई कर रहा था। अदालत ने कहा दोनों रिपोर्ट विरोधाभासी है।
अदालत ने दोनों रिपोर्ट सीपी को भेजे जाने के साथ कमिश्नर को नोटिस जारी कर रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च को होगी। 19 फरवरी 2026 को एडीशनल डीसीपी-द्वितीय, आउटर जिला ने कोर्ट को लिखित रिपोर्ट दी थी कि केस फाइल प्रॉसीक्यूशन ब्रांच को भेज दी गई है, आपत्तियां दूर कर दी गई हैं और जल्द फाइनल रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।
मात्र 8 दिन बाद यानी 27 फरवरी को जो रिपोर्ट आई, उसमें अचानक कहा कि अभी भी कई काम बाकी हैं, पीड़िता की नानी का बयान, दस्तावेजों पर मेडिकल ओपिनियन, स्वतंत्र गवाहों की तलाश। पुलिस ने तीन हफ्ते और समय मांगा। अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि 19 फरवरी की रिपोर्ट में कहीं भी कोई पेंडिंग जांच का जिक्र नहीं था। उल्टा साफ लिखा था कि जांच पूरी हो चुकी है।
आज की रिपोर्ट में अचानक नई बातें सामने आई हैं। यह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है। अदालत ने आदेश दिया कि दिल्ली पुलिस कमिश्नर से विस्तृत रिपोर्ट तलब की जाए पीड़िता की वकील ने जांच अधिकारी पर कार्रवाई की मांग की : सुनवाई में पीड़िता का प्रतिनिधित्व कर रही वकील अदिति सिंह ने पुलिस की कार्यशैली पर पुलिस अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि 13 अगस्त को मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। कानून के अनुसार 60 दिनों में आरोप पत्र दाखिल किया जाना था लेकिन छह माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आरोपपत्र दाखिल नहीं हुआ है। पीड़िता की मां भी इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कोर्ट में मौजूद थीं। पुलिस को नोटिस जारी किया गया है।