बिसाहड़ा गांव में दोनों बेटियों की शादी के बाद पिता हकीम ने काफी खुश नजर आए। उन्होंने बताया कि करीब 13 साल पहले बड़ी खातून की शादी में अलग तरह की जिम्मेदारी और भागदौड़ थी।
आज मेरी दो बेटियों की शादी में ऐसा नहीं लगा कि मेरी ही बेटियों की बारात आ रही है। आज सुबह स्कूल पहुंचा तो हिंदू भाइयों ने पहले ही सारा इंतजाम किया हुआ था। गांव के लोगों ने सहयोग किया और मेरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। ऐसे भाईचारे को देखकर मुझे बेहद खुशी है। सभी का शुक्रिया।
वहीं, शादी में बारातियों के लिए नाश्ते और भोजन की पूरी व्यवस्था हिंदुओं ने ही की थी। सभी मेहमानों को शाकाहारी भोजन परोसा गया था। शादी में आने वाले सभी हिंदू और मुस्लिम भोजन को बड़े ही चाव से खाते दिखाई दिए।
कैमरे की चकाचौंध से शरमा जाते दूल्हे
हिंदू हलवाई पर ही खाना पकाने की जिम्मेदारी थी।दूल्हों ने बातचीत में बताया कि शादी में ऐसे आयोजन की उम्मीद नहीं थी। नाजिम और मोबीन ने कहा कि जिस तरह से पहले का माहौल था वैसा अब नहीं है।
गांव में शांति है। किसी प्रकार का भय नहीं है। गांव में शादी होने से हम सभी खुश हैं। आमतौर शादियों में एक-दो ही कैमरे होते हैं, लेकिन मोमीन और नाजिम की शादी में मीडिया की मौजूदगी से कैमरों की भरमार थी।
जितनी बार कैमरे दूल्हों के सामने आते वे उसकी चकाचौंध में शरमा जाते।
गांव के ज्यादातर हिंदू परिवारों ने कन्यादान दिया
गांव के ज्यादातर हिंदू परिवारों ने कन्यादान दिया। हर कोई अपने घर से निकलकर कन्यादान करने के लिए पहुंचा। पुलिसकर्मियों ने भी कन्यादान किया। इसमें 37000 रुपये की राशि जमा हुई। इसकी जिम्मेदारी गांव के ही त्रिलोचन को दी गई थी।
जिलाधिकारी एनपीसिंह की ओर से 11 हजार रुपये और दो सिलाई मशीन दी गईं। डीएम ने भेंट की रकम एसडीएम दादरी राजेश कुमार के माध्यम से हकीम के पास पहुंचाई थी।
शादी के दौरान कोई बाधा न आए इसके लिए सुबह से ही एसडीएम राजेश कुमार और सीओ अनुराग सिंह के अलावा थानाध्यक्ष सुबोध कुमार भी गांव में ही रहे। रविवार को कुछ फोर्स बढ़ाई गई थीं।