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हिंडन का दर्द : सब होंगे साथ तो बनेगी बात, सुधार के लिए यहां दें सुझाव

Wed, 01 Jun 2016 01:33 AM IST
सुशील पांडेय/अमर उजाला, नोएडा
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तिलवाड़ा का वो स्‍थान जहां यमुना से मिलती है हिंडन - फोटो : राजन राय
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हिंडन नदी की वर्तमान दशा सुधारनी है तो सबको एक साथ काम करना होगा। यह कहना है पर्यावरणविदों व हिंडन के पदयात्रियों का। उनका साफ कहना है कि इसके उद्गम से लेकर यमुना नदी में मिलने तक के स्थान तक सभी जिलों के प्रशासन, समाजसेवी, पर्यावरणविदों और अन्य को कदम से कदम मिलाकर साथ चलना होगा। य
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ही नहीं इसकी दशा सुधारने के लिए जो भी उपाय सामने आएं उसका सिरे से पालन सभी को करना होगा। तभी हिंडन को उसकी पुरानी धारा मिल सकेगी और लोगों को हिंडन के किनारे का सुख मिल पाएगा।

अरवरी नदी को किया गया है पुनर्जीवित
राजस्थान के अरवरी नदी को जल पुरुष राजेंद्र सिंह के सहयोग से पुनर्जीवित किया गया है। करीब 20-25 किलोमीटर लंबी नदी मृतप्राय हो चुकी थी। इसके अलावा पंजाब में साबी नदी पर भी काम किया गया है। इसके भी हालात सुधरे हैं।
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हिंडन प्राधिकरण की जरूरत
पर्यावरणविदों का कहना है कि हिंडन नदी की दशा सुधारने के लिए हिंडन प्राधिकरण की सख्त जरूरत है ताकि इसकी दशा सुधारने के लिए पूरे वर्ष काम चलता रहे और काम रुकने का खतरा न हो।

उधर, पर्यावरणविद् विजयपाल बघेल का कहना है कि अलग-अलग स्थानों पर पांच नदियां हिंडन की सहायता करती हैं। इनका पानी हिंडन को जिंदा करता है। लेकिन इनकी हालत भी कुछ ठीक नहीं है। इसमें पांवधोई, चैचेई, नागदेई, कृष्णा और काली नदी है। वहीं धमोला नाला का पानी भी हिंडन में जाता है। इनके भी उद्धार की जरूरत है।

यूपी सरकार और नदियों के कार्यकर्ता कर रहे काम
हिंडन की दशा सुधारने के लिए यूपी सरकार और जल पुरुष राजेंद्र सिंह की ओर से साझा प्रयास किया जा रहा है। इसमें अरवरी नदी को पुनर्जीवित करने की तर्ज पर हिंडन की दशा सुधरने की उम्मीद है। 

जून में इस बाबत एक बैठक प्रस्तावित है। यही नहीं सहारनपुर और मेरठ के कमिश्नर हिंडन को लेकर प्रत्येक दो माह पर एक बैठक करते हैं और इसकी दशा सुधारने पर मंथन होता है। 

बैराज से लगातार पानी छोड़ने की करनी होगी अपील
हिंडन के पदयात्री विक्रांत शर्मा का कहना है कि गाजियाबाद के बैराज से लगातार पानी छोड़ने की अपील नोएडा के लोगों को करनी होगी। दरअसल, यहां से पानी ही नहीं छोड़ा जा रहा है। बेहद कम मात्रा में गंगाजल कासना में छोड़ा जाता है। लेकिन इससे नोएडा के लोगों को कोई फायदा नहीं होता। अगर हिंडन में पर्याप्त मात्रा में बैराज से पानी छोड़ा जाएगा तो अतिक्रमण भी घटेगा। यही नहीं नोएडा का ग्राउंड वाटर लेबल भी बढ़ेगा।

नदी को बचाने के लिए तकनीक का सहारा
पर्यावरण कार्यकर्ता विक्रांत तोंगड़ का कहना है कि हिंडन को बचाने के लिए रियल टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम का सहारा लेना होगा। इसके माध्यम से बढ़ रहे प्रदूषण पर पल-पल का अपडेट होगा। यही नहीं उद्योगों के किस नाले से कितना प्रदूषण हिंडन में मिल रहा है इस पर भी निगरानी की जरूरत है ताकि इसे रोका जा सके।

हिंडन के विजन डॉक्यूमेंट पर चल रहा काम
हिंडन में प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में विजन डॉक्यूमेंट तैयार किए जाने पर काम चल रहा है। इसके लिए स्टेक होल्डर्स की एक बैठक भी की गई। इसमें औद्योगिक उत्प्रवाह निस्तारण एवं नियंत्रण, नगरीय ठोस अपशिष्ट निस्तारण एवं नियंत्रण, नदी क्षेत्र में अतिक्रमण, नदी में जलप्रवाह की स्थिति, भूगर्भीय जल प्रदूषण एवं पेयजल आपूर्ति, तटवर्ती क्षेत्रों में बीमारियों का अनुश्रवण, वृक्षारोपण, तालाबों का चिंहिकरण सहित अन्य कार्य योजनाएं बनाने पर बातचीत हुई।

आप भी दे सकते हैं राय
हिंडन नदी की वर्तमान दशा में सुधार के लिए क्या करना चाहिए। इसको फिर से एक जीती जागती नदी बनाने के लिए अगर आपके पास कोई आइडिया है तो आप 9873698015 पर व्हाट्सऐप कर सकते हैं या shiva@del.amarujala.com पर ई-मेल के माध्यम से भी अपनी राय दे सकते हैं।
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