ओखला बैराज के समानांतर यमुना नदी पर निर्माणाधीन पुल का निर्माण कार्य मंद पड़ गया है। पुल को इस साल अगस्त में पूरा होना था लेकिन अभी इसके पिलर ही पूरे नहीं हो पाए हैं। निर्माण कंपनी एनकेजी के प्रोजेक्ट मैनेजर का कहना है कि प्राधिकरण की ओर से बाकी राशि का भुगतान नहीं किया गया है, जिसकी वजह नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह की सीबीआई जांच हो सकती है।
काली कमाई के कुबेर यादव सिंह की जांच में जुटी सीबीआई के जांच के दायरे में एनकेजी कंपनी भी है। यमुना पुल के अलावा एनकेजी के पास शहर के और तमाम प्रोजेक्ट भी हैं। एनकेजी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के प्रोजेक्ट मैनेजर ओम हरी ने बताया कि पुल को अगस्त 2016 में पूरा करने का लक्ष्य था लेकिन प्राधिकरण की ओर से बाकी राशि का भुगतान नहीं हुआ है।
ऐसे में हालात ऐसे हैं कि मजदूरों को तीन माह से मजदूरी नहीं दी मिली है। करीब 70 मजदूर काम छोड़कर जा चुके हैं। रुपया न होने के कारण पुल का निर्माण कार्य काफी धीमा हो गया है।उन्होंने बताया कि जुलाई से यदि बारिश शुरू हो जाती है तो सितंबर तक पुल का काम बाधित रहेगा। प्राधिकरण की ओर से रुपया मिलने का आश्वासन मिला है। रुपया यदि मिल भी जाता है तब भी पुल का निर्माण एक साल से पहले पूरा नहीं हो सकेगा।
प्राधिकरण सूत्रों के मुताबिक यादव सिंह मामले में एनकेजी को लेकर सीबीआई की जांच स्पष्ट होने का प्राधिकरण इंतजार कर रही है। ऐसे में कंपनी को दिए गए तमाम प्रोजेक्ट की गति भी धीमी पड़ गई है। फिलहाल कंपनी के एमडी को सीबीआई कोर्ट की तरफ से हाजिर होने का नोटिस जारी हो चुका है।
करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपए है लागत
करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपए की लागत का यह पुल मौजूदा पुल से मौजूदा पुल से करीब 120 मीटर बाई तरफ बन रहा है छह लेन के पुल की चौड़ाई 17.3 मीटर और लंबाई 574 मीटर तय है। पुल का निर्माण नोएडा से दिल्ली आने जाने वालों लोगों को जाम से बचाने के लक्ष्य को देखते हुए शुरू हुआ है।
इसके बनने के बाद नोएडा से दिल्ली जाने वाले वाहन इस पुल का इस्तेमाल करेंगे, जबकि दिल्ली से नोएडा आने वाले मौजूदा पुल से आ सकेंगे। इसके बनने से ओखला बैराज पर ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात मिल जाएगी। साथ ही डीएनडी पर भी वाहनों का दबाव कम हो जाएगा। इसके गार्डर का वजन 135 टन है।