दिल्ली हाईकोर्ट ने सांसदों को यात्रा भत्ते में अतिरिक्त भुगतान करने के मामले में हैरानी जताई है। अदालत ने कहा कि जब सांसदों को रेलवे में मुफ्त यात्रा के लिए पास व हवाई यात्रा में किराये में छूट मिलती है तो फिर अलग से किराया भत्ता क्यों दिया जाता है? अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश एनवी रामन व न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडला की खंडपीठ ने सरकार को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि रेलवे में सांसदों को दोहरा भत्ता व अन्य भत्तों में अतिरिक्त भुगतान क्यों किया जाता है।
अदालत ने कहा कि जजों को भी वही यात्रा भत्ता प्रदान किया जाता है जो उन्होंने खर्च किया है, फिर सांसदों को अतिरिक्त भुगतान क्यों। खंडपीठ ने बीएनपी सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई पर यह निर्देश दिया।
इससे पहले केंद्र सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त सालीसीटर जनरल राजीव मेहरा ने कहा कि वे संसदीय कार्य मंत्रालय से डिटेल लेकर ही जवाब दाखिल कर सकते हैं। वहीं, याची के अधिवक्ता सिताब अली चौधरी ने अदालत ने बताया कि रेलवे सांसदों को फीस पास जारी करता है।
इसके बावजूद सांसद यात्रा भत्ते के रूप में टिकट का किराया वापस लेते हैं। वे फ्री पास होने के बावजूद उसी यात्रा का किराया वसूलते हैं। हवाई यात्रा में भी सांसद 25 प्रतिशत अधिक किराया वसूलते हैं। यदि सांसद एक रुपये खर्च करते हैं तो उसकी एवज में 1.25 रुपये वसूलते है। यह सरासर गैरकानूनी, मनमाना व भेदभाव पूर्ण रवैया है।