प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ व घर-घर में शौचालय के पाठ को उन्हीं की सरकार के मंत्रालय पलीता लगा रहे हैं।
रक्षा मंत्रालय ने तर्क रखा है कि नेवी में महिला अधिकारियों को मात्र इस कारण भी स्थायी नहीं किया जा सकता कि जहाज पर महिला अधिकारियों के लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था नहीं कर सकते।
हाईकोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि इस बेतुके तर्क के आधार पर महिलाओं से भेदभाव नहीं किया जा सकता।
लिंग के आधार पर नहीं कर सकते भेदभावः HC
न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर व न्यायमूर्ति नजमी वजीरी की खंडपीठ ने हाल ही में नेवी महिला अधिकारियों को जबरन रिटायर करने के निर्णय पर रोक जारी रखते हुए सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश जारी किया है और अगली सुनवाई सात अगस्त तय की है।
खंडपीठ ने करीब एक दर्जन नेवी महिला अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार के उस तर्क को भी खारिज किया कि 12 मार्च 2010 को एयरफोर्स में महिला अधिकारियों को स्थायी करने संबंधी हाईकोर्ट का फैसला नेवी अधिकारियों पर लागू नहीं होता।
अदालत ने कहा कि जब स्थायी कमीशन तय हो चुका है तो वह फैसला सभी पर लागू होगा।
प्रशिक्षण के दौरान क्यों नहीं दिया जाता ये तर्क
केंद्र सरकार की और से पेश अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल संजय जैन ने तर्क रखा कि जहाज पर महिला अधिकारियों को परेशानी होती है और उनके लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था करना भी संभव नहीं है।
याची अधिकारियों की ओर से पेश अधिवक्ता रेखा पल्लाई ने कहा कि महिला अधिकारियों को सेवा के दौरान जहाज पर प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है उस समय यह तर्क क्यों नहीं रखा जाता। यह तर्क बेकार है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल शार्ट टर्म कमीशन में महिला व पुरुष अधिकारियों को भर्ती किया जाता था। इसके बाद 14 वर्ष की सेवा के बाद महिला अधिकारियों को तो रिटायर कर दिया जाता है, जबकि पुरुष अधिकारियों को स्थायी रूप से कमीशन प्रदान किया जाता था।
महिला अधिकारियों ने इस तथ्य को लिंग के आधार पर भेदभाव का मुद्दा बनाकर हाईकोर्ट में चुनौती दी है। महिला अधिकारियों की अधिवक्ता रेखा पल्लई ने तर्क रखा था कि जब महिला व पुरुष अधिकारी एक समान काम करते हैं तो मात्र पुरुषों को स्थायी कमीशन देना उचित नहीं है।
एयरफोर्स महिला कर्मियों के हक में दिया था फैसला
न्यायमूर्ति संजय कृष्ण कौल व न्यायमूर्ति मूलचंद गर्ग की खंडपीठ ने 12 मार्च 2010 को दिए फैसले में एयरफोर्स महिला अधिकारियों के साथ लिंगभेद के आधार पर भेदभाव की नीति को गलत ठहराया था।
बता दें कि उन्होंने शार्ट कमीशन में भर्ती महिला अधिकारियों को पुरुष अधिकारियों के समान स्थायी कमीशन प्रदान करने का निर्देश दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि महिला जननी है और पुरुषों के साथ उसकी सहभागिता को नहीं रोका जा सकता।