हाईकोर्ट ने सार्वजनिक स्थल पर बुर्का व चेहरे पर पर्दा लगाकर चलने पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यह जनहित का मुद्दा नहीं है। याचिका में तर्क रखा गया था कि बुर्के से आम लोगों के जीवन की सुरक्षा को खतरा है।
मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने कहा कि यदि यह एक नीतिगत निर्णय है तो सरकार को इस पर ध्यान रखना होगा। हम इस याचिका को कैसे जनहित में मानकर सुनवाई कर लें। अदालत ने कहा कि हम इस मुद्दे पर हस्तक्षेप नहीं कर सकते। याचिकाकर्ता सरदार रवि रंजन सिंह ने आग्रह किया था कि राजधानी में सार्वजनिक स्थलों जैसे परिवहन, सरकारी इमारतों और विरासत स्थलों पर बुर्का, हेलमेट इत्यादि के पहनकर जाने पर रोक लगाई जाए।
चेहरे के कवरिंग के उपयोग और बुर्का से पूरा शरीर कवर करने से नागरिकों की सुरक्षा को गंभीर खतरा है। यह सरासर संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आम लोगों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संरक्षण के अधिकार का हनन है।