दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत के अटॉर्नी जनरल (एजीआई) का कार्यालय सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के दायरे में आता है। अदालत ने कहा कि शीर्ष कानून अधिकारी सार्वजनिक कार्य करता है और उनकी नियुक्ति सरकार संविधान के अनुसार करती है।
न्यायमूर्ति विभू बाखरू ने अपने फैसले में कहा कि इसमें कोई विवाद नहीं है कि एजीआई का कार्य सार्वजनिक प्रकृति का है और वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 76 (2) के तहत काम करते हैं। उन्होंने कहा सर्वोच्च न्यायालय की संविधानिक पीठ ने भी कहा है कि एजीआई पब्लिक अधिकारी है।
अदालत ने केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा दिसंबर 2012 को दिए उस फैसले को खारिज कर दिया कि एजीआई का कार्यालय पब्लिक अथॉरिटी नहीं है। अदालत ने सरकार के उस तर्क को स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि एजीआई कार्यालय को पब्लिक अथारिटी मानने से अधिनियम के तहत सूचना उपलब्ध कराने में एक व्यावहारिक कठिनाई आएगी। अदालत ने यह आदेश आरटीआई कार्यकर्ताओं सुभाष चंद्र अग्रवाल और आरके जैन के तर्कों को स्वीकार करते हुए दिया।