रिश्वत लेने के आरोप में बर्खास्त हुए सीबीआई अफसर को हाईकोर्ट ने दी पुनर्नियुक्ति
- अदालत ने सभी लाभ के साथ दोबारा डीएसपी पद पर नियुक्त किए जाने का आदेश दिया
- अदालत ने कहा साक्ष्यों के स्थान पर सट्टेबाजों और जांच अधिकारी को धमकाने के आरोप पर ही दी गई बर्खास्तगी
- अदालत ने अफसरों को कानूनों को लागू करने में सावधानी बरतने की सलाह दी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई के पूर्व डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) नीरज अग्रवाल की सेवा से बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है। अदालत ने बिना जांच के हुई कार्रवाई को असंवैधानिक बताते हुए उन्हें सेवा में बहाल करने और सभी लाभ देने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा बिना किसी प्रत्यक्ष साक्ष्य के केवल आरोपों के आधार पर अधिकारियों को बर्खास्त करना ठीक नहीं, अदालत ने अधिकारियों को कार्रवाई के दौरान कानूनों के सही प्रयोग की सलाह दी है।
नीरज अग्रवाल 1988 में सीआईएसएफ में सब-इंस्पेक्टर के रूप में शामिल हुए थे। 1999 में सीबीआई में प्रतिनियुक्ति पर आए और 2008 में स्थायी रूप से सीबीआई में ही सेवारत हो गए। 2014 में उन्हें डीएसपी पद पर पदोन्नत किया गया और मुंबई की बैंकिंग सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड सेल (बीएसएंडएफसी) में तैनात किया गया। वहां रिश्वत लेने के आरोप में 23 अप्रैल 2017 को सीबीआई ने उन्हें ट्रैप में फंसाया और गिरफ्तार किया। एफआईआर के आधार पर अनुशासनिक कार्रवाई में अनुच्छेद 311(2)(बी) और सीसीएस (सीसीए) नियमों के नियम 19(ii) के तहत बिना जांच के 19 जून 2018 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।