कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन व न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘ऐसा नहीं है कि आप यह सब नजरअंदाज कर दें। आप सरकार हैं, आपको धन जारी करना होगा।
उच्च न्यायालय ने छह नवनिर्मित सरकारी स्कूल भवनों के कथित रूप से उपयोग नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने कहा, बकाया राशि का भुगतान न होने के कारण छात्र इसका उपयोग करने से वंचित है। ऐसा क्यों हो रहा है? ये मामले अदालत में क्यों आ रहे हैं? यदि कोई वित्तीय आपातकाल है, तो हमें बताएं।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन व न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘ऐसा नहीं है कि आप यह सब नजरअंदाज कर दें। आप सरकार हैं, आपको धन जारी करना होगा। याचिकाकर्ता एनजीओ सोशल ज्यूरिस्ट ने अपनी जनहित याचिका में दावा किया कि पिछले दो वर्षों से मुकुंदपुर, बख्तावरपुर, लांसर रोड, रानी बाग, रोहिणी और एमएस पंजाब खोरे में 358 कक्षाओं वाले छह नवनिर्मित स्कूल भवनों का कब्ज़ा 16.67 करोड़ रुपये के भुगतान को मंजूरी देने में शहरी वितरण की निष्क्रियता के कारण नहीं लिया जा सका।
स्कूल बसों के लिए याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा
उच्च न्यायालय ने पूर्वोत्तर जिले के कई सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को अन्य जिलों के स्कूलों में पढ़ने में सक्षम बनाने के लिए लगभग 360 बसें उपलब्ध कराने की मांग याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। एनजीओ सोशल ज्यूरिस्ट ने आरोप लगाया है कि पूर्वोत्तर जिले में कुछ सरकारी स्कूल पूर्णकालिक शिक्षा नहीं दे रहे हैं क्योंकि ये या तो दिन में केवल दो घंटे या वैकल्पिक दिनों में काम करते हैं।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन व न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता केवल बच्चों को अन्य स्कूलों में भेजने के लिए 367 बसों की मांग कर रहा है, जबकि उनके अपने जिले में स्कूल भवन का निर्माण किया जा रहा है। बच्चों को स्कूल जाना चाहिए।